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बस्तर में प्रधानमंत्री आदिवासी आदर्श ग्राम योजना पर सवाल : बिना कार्य के संतुष्टि प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर कराने का खेल

डमरू कश्यप,जगदलपुर।बस्तर जिले में प्रधानमंत्री आदिवासी आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत वर्ष 2022-23 में स्वीकृत स्ट्रीट लाइट एवं बोर खनन कार्य आज तक प्रारंभ तक नहीं हो सका है। आशा और विकास के सपनों के बीच यह योजनाएँ अब तक कागज़ों में ही कैद हैं, जबकि ज़मीनी हकीकत में गांव अंधकार और प्यास से जूझ रहे हैं।

ग्राम पंचायतों के सरपंचों के साथ छल का खेल भी कम चौंकाने वाला नहीं है। सरपंचों को न तो वर्क ऑर्डर की जानकारी दी गई और न ही किसी प्रकार की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराई गई। इसके बावजूद अधिकारियों ने उन्हें गुमराह कर बिना कार्य किए ही संतुष्टि प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करवा लिए।

गंभीर आरोप यह है कि कार्य एजेंसी — अनुविभागीय अधिकारी, विद्युत यांत्रिकी (लाइट एवं मशीनरी), नलकूप एवं गेट उपसंभाग, जगदलपुर — की देखरेख में यह समूचा खेल रचा गया है। यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा होना तय है। इसमें न केवल ठेकेदारों, बल्कि अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

बस्तर के ग्रामीण जिन योजनाओं की आस लगाए बैठे हैं, वे अभी भी अधर में लटकी हैं। सवाल उठना लाजिमी है कि बिना काम किए विकास के नाम पर यह छल कब तक जारी रहेगा और जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?

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