
डमरू कश्यप
जगदलपुर,5 अगस्त 2026
नगर के अनुपमा चौक स्थित एक व्यापारी के गोदाम से 378 बोरी पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) चावल जब्त किए जाने के मामले में अब भी कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि गरीबों के हिस्से का यह चावल आखिर किस राशन दुकान से निकला था। खाद्य विभाग अब तक इसकी पुष्टि नहीं कर पाया है, जिससे मामले पर रहस्य बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, जब्त किए गए 378 बोरी चावल में 88 बोरी सरकारी बारदाने में भरे हुए थे, जिन पर राइस मिलर्स के टैग और लॉट नंबर अंकित थे। वहीं, 290 बोरी चावल प्लास्टिक की बोरियों में भरे मिले। लॉट नंबर होने के बावजूद विभाग यह पता लगाने में सफल नहीं हुआ कि यह चावल किस वेयरहाउस से किन राशन दुकानों में भेजा गया था।
मामले को लेकर खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि विभागीय मिलीभगत के कारण मामले की जांच अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है। हालांकि विभाग का कहना है कि पूरी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है और आगे की कार्रवाई उनके निर्देश मिलने के बाद की जाएगी।
कार्रवाई के दौरान चावल से भरे एक ट्रक और एक पिकअप वाहन को भी जब्त किया गया था, लेकिन अब तक चावल माफिया तक पहुंचने में विभाग नाकाम रहा है। क्षेत्र में लंबे समय से पीडीएस चावल की अवैध खरीद-फरोख्त और उसे राइस मिलर्स तक पहुंचाने की चर्चाएं होती रही हैं।
लॉट नंबर से खुल सकता है पूरा नेटवर्क
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी बारदाने पर अंकित लॉट नंबर के आधार पर यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि संबंधित चावल किस वेयरहाउस से किन राशन दुकानों तक भेजा गया था। यदि इस दिशा में गहन जांच की जाए तो पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों तक पहुंचा जा सकता है।
इस मामले में जिला खाद्य अधिकारी श्री राठौर ने कहा कि जब्त चावल के आधार पर सीधे राशन दुकान की पहचान नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है और आगे की जांच कलेक्टर के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।




