राइस मिलर की मनमानी पर सरपंच के सख्त तेवर



,,सरकारी ज़मीन और सार्वजनिक सड़क पर अवैध कब्जे की कोशिश नाकाम,,

बकावंड। विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत छोटे देवड़ा-2 में सुशासन को पलीता लगाने की कोशिश का मामला सामने आया है। यहां संचालित एक राइस मिल द्वारा सरकारी ज़मीन और सार्वजनिक सड़क पर अवैध कब्जा कर मिल का विस्तार करने की कोशिश की जा रही थी, जिसे समय रहते ग्राम पंचायत ने रोक दिया।
,,सरकारी ज़मीन पर अवैध विस्तार की तैयारी,,
ग्राम पंचायत छोटे देवड़ा में संचालित तौशिब राइस मिल के संचालक द्वारा मिल के आसपास की शासकीय ज़मीन पर कब्जा कर अवैध रूप से विस्तार करने की योजना बनाई जा रही थी।
पहले राइस मिल से निकलने वाला गंदा और बदबूदार पानी खेतों में छोड़ा गया, जिससे खेती और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा।
इसके बाद राइस मिल से निकलने वाले भूसे को खुलेआम शासकीय ज़मीन पर डंप किया जाने लगा, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी दुर्गंध फैल गई।
,,भूसे की धूल से ग्रामीण बीमार,,
भूसे के ढेर और धूल के कारण गांव के कई महिला व पुरुष सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हालात ऐसे हो गए हैं कि घरों में रहना मुश्किल हो गया है।
,,अब सार्वजनिक सड़क पर कब्जा, निर्माण कार्य शुरू,,,,मामला तब और गंभीर हो गया जब राइस मिलर ने सार्वजनिक सड़क पर भूसी बेचनी शुरू कर दी,
,,मामला तब और गंभीर हो गया जब राइस मिलर ने सार्वजनिक सड़क पर भूसी बेचनी शुरू कर दी,
सड़क व आसपास की ज़मीन पर अवैध कब्जा जमा लिया,
,,और सेट निर्माण के लिए सड़क पर गड्ढे खोद दिए।
,,ग्रामीणों द्वारा विरोध किए जाने के बावजूद मिल संचालक मनमानी करता रहा।,
,,सरपंच ने मौके पर पहुंचकर रुकवाया अवैध निर्माण,,
जैसे ही इस पूरे मामले की जानकारी ग्राम पंचायत छोटे देवड़ा के सरपंच संतोष कुमार कश्यप को मिली, उन्होंने बिना देरी किए मौके पर पहुंचकर सख्त कार्रवाई की।
सरपंच ने
,,अवैध कब्जे को तुरंत हटवाया,
,,अवैध निर्माण कार्य पर रोक लगाई,
,,और ग्रामीणों के आवागमन मार्ग को सुरक्षित कराया।,,
समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो ग्रामीणों का मुख्य रास्ता पूरी तरह बाधित हो सकता था।
,,जल-जंगल-ज़मीन और सड़क तक नहीं छोड़ी,,
राइस मिल द्वारा
,,पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रदूषित किया जा रहा है,
,,जल, जंगल, जमीन और सड़क—किसी को नहीं छोड़ा गया,
,,हर जगह भूसे के ढेर लगे हुए हैं।,
यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य और जीवन से खुला खिलवाड़ भी है।
यह मामला साफ दर्शाता है कि यदि जनप्रतिनिधि सतर्क हों, तो सरकारी ज़मीन और सार्वजनिक संसाधनों पर अवैध कब्जे रोके जा सकते हैं।
अब आवश्यकता है कि प्रशासन भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में कोई भी राइस मिलर या उद्योगपति सरकारी ज़मीन पर कब्जा करने की हिम्मत न कर सके।





