उलनार के पाराओं में पहुँचा “सुरक्षित पारा सुरक्षित लईकामन 3.0”बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण व सुरक्षा पर हुआ व्यापक सर्वेक्षण



जगदलपुर,बकावंड ! बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम उलनार के विभिन्न पाराओं में “सुरक्षित पारा सुरक्षित लईकामन 3.0” परियोजना के तहत बच्चों के सर्वांगीण विकास को लेकर व्यापक जागरूकता एवं सर्वेक्षण अभियान संचालित किया गया। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करीतगांव की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा आयोजित इस अभियान में बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े अहम पहलुओं पर ग्रामीणों से विस्तारपूर्वक संवाद किया गया।
अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने माँझिपारा, थानागुड़ीपारा, इंद्रावास, बेड़कापारा एवं बालूगुड़पारा में घर-घर पहुँचकर बच्चों की शैक्षणिक स्थिति, स्वच्छता, पौष्टिक आहार, मानसिक स्वास्थ्य तथा घरेलू वातावरण से जुड़ी जानकारियाँ एकत्र कीं। सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया कि कुछ पाराओं में बच्चों की स्वास्थ्य समस्याओं और निरंतर उपचार के चलते उनकी विद्यालय में उपस्थिति प्रभावित हो रही है, जिससे शाला त्याग जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है।
स्वयंसेवकों ने इस समस्या को गंभीर सामाजिक चुनौती बताते हुए ग्रामीणों को बच्चों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित पोषण और शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया। साथ ही बाल विवाह, कुपोषण और लैंगिक हिंसा जैसी कुरीतियों के खिलाफ समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने पर जोर दिया गया।
अभियान के अंतर्गत उलनार ग्राम पंचायत के सरपंच मधुसूदन नेताम से भी बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य सुरक्षा विषय पर चर्चा की गई। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए पंचायत स्तर पर हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
उल्लेखनीय है कि इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन हेतु यूनिसेफ एवं शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, धरमपुरा (जगदलपुर) द्वारा स्वयंसेवकों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्य मोनिता पानिग्राही, राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी राहुल सिंह ठाकुर, सहायक अधिकारी वाणी हुमने, लोकेश निषाद सहित अनेक स्वयंसेवकों की सक्रिय सहभागिता रही।
कुल मिलाकर “सुरक्षित पारा सुरक्षित लईकामन 3.0” अभियान ग्रामीण अंचलों में बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा को लेकर समाज को जागरूक करने की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में उभरकर सामने आया है। स्वयंसेवकों की सक्रियता और पंचायत के सहयोग से यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा और उन्हें एक सुरक्षित, स्वस्थ व उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला प्राप्त होगी।
कुल मिलाकर “सुरक्षित पारा सुरक्षित लईकामन 3.0” अभियान ग्रामीण अंचलों में बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा को लेकर समाज को जागरूक करने की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में उभरकर सामने आया है। स्वयंसेवकों की सक्रियता और पंचायत के सहयोग से यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा और उन्हें एक सुरक्षित, स्वस्थ व उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला प्राप्त होगी।




