छत्तीसगढ़

विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य बिल पर गरमाई सियासत, विपक्ष का विरोध और नारेबाजी; विजय शर्मा बोले– कानून बनाने का राज्य को पूरा अधिकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को सदन में पेश किया गया। गृह मंत्री विजय शर्मा ने यह विधेयक प्रस्तुत किया, जिस पर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई।

नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि देश के 11 राज्यों में इसी तरह के मामलों पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित है। ऐसे में इस विधेयक पर चर्चा नहीं की जानी चाहिए और इसे प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए।

वहीं, भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने विपक्ष की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि विधेयक पूरी तरह विधि-सम्मत है और इसमें किसी प्रकार की कानूनी बाधा नहीं है।

गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस विषय पर कोई रोक (स्टे) नहीं है और राज्य सरकार को नया कानून बनाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि विधेयक को लेकर पहले से फीडबैक लिया गया है और सभी को सहमति बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।

सदन की आसंदी ने नेता प्रतिपक्ष की आपत्ति को खारिज कर दिया, जिससे नाराज विपक्ष ने पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकल गए।

इस पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी गंभीर चर्चा होती है, विपक्ष बहिर्गमन कर देता है। उन्होंने इसे “पलायन” बताते हुए कहा कि विपक्ष को आदिवासी समाज की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है।

इसके जवाब में सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी सदन के भीतर विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे विधानसभा का माहौल गरमा गया।

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