गरीबी को मात देकर बुटकी बनी आदिवासी महिला उद्यमी, मुर्गी और बकरी पालन से घर-परिवार का भविष्य संवार रही



जगदलपुर, 13 नवम्बर 2025/ छत्तीसगढ़ के दूरदराज के आदिवासी इलाकों में गरीबी और कठिन मजदूरी जीवन की सामान्य सच्चाई हुआ करती थी, लेकिन बिहान योजना की एकीकृत फार्मिंग क्लस्टर परियोजना ने महिलाओं की जिंदगी में नई रोशनी ला दी है।
ग्राम पंचायत तराईगुड़ा नेगानार की बुटकी नाग, जो पहले दूसरों के खेतों में मजदूरी कर परिवार का पेट भरती थीं, आज आत्मनिर्भर किसान और सफल उद्यमी बन चुकी हैं। अपने पति जयसिंह नाग के साथ बुटकी अब अपनी तीन एकड़ जमीन पर धान, मक्का और साग-सब्जियों की खेती करने के साथ-साथ मुर्गी पालन और बकरी पालन से अतिरिक्त आय भी जुटा रही हैं।
साल 2020 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की बिहान योजना से जुड़कर बुटकी ने सीता माता महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया। समूह को रिवॉल्विंग फंड के रूप में 15 हजार रुपए और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के रूप में 60 हजार रुपए मिले, जिससे उन्होंने अपनी खेती की नींव रखी।
ब्लॉक मुख्यालय दरभा से मात्र 15 किलोमीटर दूर स्थित तराईगुड़ा नेगानार गांव में बुटकी की तीन एकड़ जमीन अब हरी-भरी फसलों से लहलहा रही है। एकीकृत कृषि प्रणाली के तहत उन्होंने डेढ़ एकड़ में धान, एक एकड़ में मक्का की खेती की, जबकि आधे एकड़ जमीन पर तोरई, करेला और सेम जैसी सब्जियों की पैदावार हो रही है।
खाली पड़ी जमीन का सदुपयोग करते हुए बुटकी ने मुर्गी पालन शुरू किया और बकरी शेड बनवाकर बकरी पालन भी किया। पहले परिवार की आमदनी सिर्फ मजदूरी तक सीमित थी, लेकिन अब खेती और पशुपालन से आर्थिक स्थिति मजबूत हो गई है।
बुटकी गर्व से बताती हैं, “बिहान योजना ने हमें न केवल वित्तीय मदद दी, बल्कि विविध आय के साधन सिखाकर जीवन बदल दिया।”
बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में यह परियोजना सैकड़ों महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदल रही है, जो गरीबी की जंजीरों से मुक्त होकर स्वावलंबन की मिसाल कायम कर रही हैं।




