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Narendra Modi आज साणंद में ₹22,516 करोड़ के सेमीकंडक्टर संयंत्र का करेंगे उद्घाटन

नई दिल्ली/साणंद, 28 फरवरी 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को गुजरात के साणंद में एडवांस सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) फैसिलिटी का उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन के तहत भारत की सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

₹22,516 करोड़ का निवेश, वैश्विक बाजार पर नजर

यह अत्याधुनिक संयंत्र Micron Technology की भारतीय इकाई Micron Semiconductor Technology India Pvt. Ltd. द्वारा लगभग ₹22,516 करोड़ के निवेश से विकसित किया गया है। यहां सॉलिड स्टेट ड्राइव (SSD), DRAM और NAND जैसे मेमोरी उत्पादों की असेंबली, परीक्षण, मार्किंग और पैकेजिंग की जाएगी। उत्पादन का लक्ष्य घरेलू के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग को पूरा करना है।

5 हजार तक रोजगार की संभावना

अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में संयंत्र में करीब 2,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। आने वाले वर्षों में यह संख्या बढ़कर लगभग 5,000 तक पहुंचने की उम्मीद है। कंपनी ने बताया कि यहां दिव्यांगजनों को भी ऑपरेटर और टेक्नीशियन के रूप में अवसर दिया गया है।

एआई युग में मेमोरी की बढ़ती मांग

माइक्रोन टेक्नोलॉजी के अध्यक्ष और सीईओ संजय मेहरोत्रा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विस्तार के साथ मेमोरी और स्टोरेज की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। तेज और रियल-टाइम प्रोसेसिंग के लिए उन्नत मेमोरी सॉल्यूशंस की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।

रेत से चिप तक: कैसे बनती है सेमीकंडक्टर

सेमीकंडक्टर निर्माण प्रक्रिया रेत से शुद्ध सिलिकॉन निकालने से शुरू होती है। सिलिकॉन को पिघलाकर इंगट में ढाला जाता है और फिर पतली वेफर्स में काटा जाता है। फेब्रिकेशन प्लांट में इन वेफर्स पर फोटोलिथोग्राफी के जरिए इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन तैयार कर ट्रांजिस्टर और मेमोरी स्ट्रक्चर बनाए जाते हैं।

इसके बाद वेफर्स को चिप्स में काटकर साणंद स्थित ATMP संयंत्र भेजा जाता है, जहां उनकी असेंबली और गुणवत्ता परीक्षण किया जाता है। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद चिप्स को पैक कर बाजार में भेजा जाता है।

गुजरात बनेगा सेमीकंडक्टर हब

राज्य सरकार का दावा है कि यह परियोजना निर्धारित समयसीमा में पूरी की गई है और इससे गुजरात भारत के सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में उभरेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संयंत्र भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने में मदद करेगा।

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