“मेरा रेशम मेरा अभिमान” अभियान के तहत नारायणपुर में किसानों को मिला उन्नत प्रशिक्षण, महिलाओं की रही सक्रिय भागीदारी


नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के आदका गांव में “मेरा रेशम मेरा अभिमान” अभियान के अंतर्गत किसानों के लिए रेशमकीट खाद्य पौधा रोग और कीट प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. बी. तिरुपम रेड्डी, वैज्ञानिक-सी, और ताहिर सिद्दीकी, वरिष्ठ तकनीकी सहायक, सीएसबी-बीएसएमटीसी बस्तर ने किया।
कार्यक्रम में 80 से अधिक किसान शामिल हुए, जिनमें बड़ी संख्या में महिला किसान भी मौजूद थीं। प्रशिक्षण में उन्नत रेशमकीट पालन प्रौद्योगिकी, रोग और कीट प्रबंधन के आधुनिक उपायों पर गहन चर्चा हुई, ताकि रेशमकीट फसलों को स्वस्थ और अधिक उत्पादक बनाया जा सके।
इस अवसर पर विशेषज्ञों ने जीवन सुधा, एलएसएम और टीकेओ जैसी नवीन प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर भी प्रकाश डाला। इन तकनीकों का उद्देश्य स्थायी कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देना और ग्रामीण आजीविका में सुधार करना है।
महिला किसानों की उत्साही भागीदारी ने इस अभियान की समावेशी विकास दृष्टि को और मजबूत किया। यह पहल मेघालय के री-भोई जिले जैसी सफल परियोजनाओं से मेल खाती है, जहां ऐसे ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने कच्चे रेशम उत्पादन को गति दी है और स्थानीय किसानों को सशक्त बनाया है।
👉 यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल किसानों को तकनीकी ज्ञान प्रदान करता है, बल्कि रेशम उत्पादन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका सुधार का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।




