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जगदलपुर से बड़ी खबर : फूल रथ की पहली परिक्रमा विधि-विधान के साथ संपन्न, परंपरा बहाली की कोशिश अधूरी

जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व के तहत बुधवार देर रात फूल रथ की पहली परिक्रमा विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर देवी दंतेश्वरी के छत्र और डोली को फूलों से सजे रथ पर विराजमान कर परिक्रमा की गई।

हालांकि इस बार परिक्रमा में अपेक्षाकृत देर हुई। दरअसल, राजपरिवार के सदस्य कमल चंद भंजदेव को रथ पर चढ़ाने की परंपरा को लेकर मांझी-चालकी ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। वहीं पटेल समाज भी राजपरिवार के सदस्य को रथ पर चढ़ाने पर अड़ा रहा, लेकिन प्रशासन ने इसे मंजूरी नहीं दी। इसी कारण परिक्रमा शुरू होने में विलंब हुआ।

घटनाक्रम के दौरान कलेक्टर, एसपी सहित जिले के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे और स्थिति को संवेदनशीलता से नियंत्रित करते हुए रथ परिक्रमा की परंपरा को निर्विघ्न संपन्न कराया।

हर वर्ष की तरह इस बार भी नया रथ तैयार किया गया। करीब 25 दिनों की मेहनत के बाद कारीगरों ने परंपरागत औजारों से लकड़ी का चार पहियों वाला रथ बनाया था, जिसे फूलों और कपड़ों से सजाकर परिक्रमा कराई गई।

बस्तर दशहरा पर्व 75 दिनों तक चलता है और यह दुनिया के सबसे लंबे धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है।

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