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बस्तर: पीएम आदर्श ग्राम योजना में 31.69 करोड़ की स्ट्रीट लाइट स्वीकृति, टेंडर और कार्य पर विवाद – ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल, कांग्रेस शासनकाल पर लगे आरोप

डमरू कश्यप,जगदलपुर। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (PMAAGY) के अंतर्गत बस्तर अंचल के 184 ग्रामों में स्ट्रीट लाइट कार्यों के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कुल ₹31.69 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसमें राजस्व मद के तहत ₹12.40 करोड़ और पूंजी मद के तहत ₹19.28 करोड़ का आबंटन किया गया था। आदेश क्रमांक /1170/ परि. प्रशा/PMAAGY/सांख्यिकी/2022-23, दिनांक 12 दिसंबर 2022 के अनुसार 541.075 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई, जिसमें से 270.537 लाख रुपये (दो करोड़ सत्तर लाख तिरपन हजार सात सौ रुपये) की पहली किस्त PFMS के माध्यम से अनुविभागीय अधिकारी विद्युत यांत्रिकी, लाईट एवं मशीनरी नलकूप एवं गेट उपसंभाग, जगदलपुर को जारी की गई।

टेंडर और कार्य में देरी

सूत्रों का कहना है कि कई ग्रामों में आज तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है, वहीं कुछ स्थानों पर बिना कार्य कराए ही संतुष्टि प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए। कई पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें इस कार्य की जानकारी तक नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में पहले से लगे स्ट्रीट लाइट को ही नए कार्य के रूप में दिखाया जा रहा है।

जब इस संबंध में विभागीय अधिकारी एसडीओ निल प्रकाश से पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि वे इस विषय में “अधिकृत नहीं हैं।” रायपुर स्थित ई-विभाग से भी संपर्क किया गया, लेकिन वहां भी यही जवाब मिला – “मुझे नहीं मालूम और मैं अधिकृत नहीं हूँ।” इससे मामला और संदिग्ध हो गया है कि आखिर इस योजना में जवाबदेही किसकी है।

कांग्रेस शासनकाल पर आरोप

ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि यह गड़बड़ी कांग्रेस सरकार के समय से चली आ रही है। आरोप यह भी है कि उस दौरान केंद्रीय मद के करोड़ों रुपये बिना कार्य कराए ही डकार लिए गए। पंचायतों से दबाव बनाकर संतुष्टि प्रमाणपत्रों पर हस्ताक्षर करा लिए गए, जबकि जमीनी स्तर पर कोई नया काम नहीं हुआ। पहले से किए गए कार्यों को ही नए काम के रूप में दिखा दिया गया।

स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि केंद्रीय मद की राशि की बंदरबांट कांग्रेस शासन में बड़े पैमाने पर हुई और पीएम आदर्श ग्राम योजना इसका ताजा उदाहरण है। अब जबकि राज्य में नई सरकार है, फिर भी अधिकारी जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं और भ्रष्टाचार का खेल चुपचाप जारी है।

ग्रामीणों की नाराजगी और मांग

ग्रामवासियों का कहना है कि योजनाओं का संचालन पारदर्शी और नियमों के अनुसार होना चाहिए। “अगर पैसा आया है तो काम जमीन पर दिखना चाहिए, न कि केवल कागजों पर,” ग्रामीणों का कहना है। पंचायत प्रतिनिधियों ने भी इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

बड़ा सवाल – जवाबदेही किसकी?

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों की राशि स्वीकृत और जारी हो गई, लेकिन न तो काम सही से हुआ और न ही अधिकारी इसकी जवाबदेही लेने को तैयार हैं। जब अधिकृत अफसर ही जिम्मेदारी से बच रहे हैं, तो फिर योजनाओं के क्रियान्वयन की सच्चाई कौन सामने लाएगा?

*बॉक्स


  • हर केंद्रीय मद में फर्जीवाड़ा!

बिना काम कराए ही करोड़ों की राशि आहरित

पंचायतों से दबाव बनाकर संतुष्टि प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर

पहले किए गए कार्य को नए कार्य के रूप में दर्शाया गया

कांग्रेस शासनकाल में केंद्रीय मद के नाम पर बंदरबांट

नई सरकार में भी अधिकारी जवाबदेही से बचते नजर आए

ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो आने वाले समय में प्रधानमंत्री आदर्श एवं उत्कृष्ट ग्राम योजना समेत अन्य केंद्रीय योजनाओं में भी इसी तरह की गड़बड़ियां जारी रहेंगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और जिम्मेदार अधिकारी इस मुद्दे पर कब और क्या कार्रवाई करते हैं।

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