,,बस्तर में बाल संरक्षण की मिसाल,,कलेक्टर आकाश छिकारा की पहल से पाँच बच्चों को मिला सुरक्षित और स्नेहपूर्ण भविष्य

,,बस्तर में बाल संरक्षण की मिसाल,,

जगदलपुर। जिले में बाल संरक्षण और बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में बस्तर जिला प्रशासन ने एक संवेदनशील और प्रेरणादायी पहल को साकार किया है। कलेक्टर आकाश छिकारा के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग की फोस्टर केयर योजना के अंतर्गत दो जागरूक परिवारों को कुल पाँच बच्चों की जिम्मेदारी विधिवत रूप से सौंपी गई।
,,बाल कल्याण को सर्वोपरि रखने वाला निर्णय,,
जिला बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार संपन्न की गई इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों को सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और स्थायी पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराना है, जिन्हें विशेष देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता है। फोस्टर केयर के माध्यम से बच्चों को न केवल भावनात्मक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उनके बेहतर स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समग्र विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
,,फोस्टर परिवारों से सीधा संवाद,,
इस अवसर पर कलेक्टर श्री छिकारा ने फोस्टर परिवारों से संवाद करते हुए बच्चों के पालन-पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन बाल संरक्षण तंत्र को निरंतर सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा फोस्टर परिवारों को भविष्य में भी हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
बस्तर के इन दो परिवारों द्वारा पाँच बच्चों की जिम्मेदारी लेना मानवीय संवेदना, सामाजिक उत्तरदायित्व और सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
,,प्रशासनिक समन्वय से सफल हुआ अभियान,,
इस पूरी प्रक्रिया को सफल बनाने में प्रशासनिक तालमेल और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष नरेन्द्र पाणिग्राही, सदस्य वर्षा श्रीवास्तव, धनेश्वरी वर्मा, सन्तोष जोशी, रामकृष्ण ठाकुर, जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज सिन्हा एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी डॉ. विजय शंकर शर्मा की टीम ने बच्चों के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए इस कार्य को सुनिश्चित किया।
,,यूनिसेफ का तकनीकी सहयोग,,
तकनीकी सहयोगी संस्था यूनिसेफ से संबद्ध सीईएसी के जिला अधिकारी रमेश कुमार दास ने फोस्टर केयर प्रक्रिया, क्षमता निर्माण एवं पारदर्शी दस्तावेजीकरण में अहम योगदान दिया।
,,समाज में संवेदनशीलता का संदेश,,
सामुदायिक जागरूकता और प्रशासनिक तत्परता के समन्वय से शुरू हुई यह पहल न केवल इन पाँच बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी, बल्कि समाज में बाल अधिकारों और संरक्षण के प्रति नई संवेदनशीलता भी जागृत करेगी।
बस्तर जिला प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम भविष्य में जिले में एक सुदृढ़, संवेदनशील और व्यवस्थित बाल संरक्षण प्रणाली की नींव रखने वाला साबित होगा। यह पहल निश्चय ही अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।




