**शिक्षा से क्रांति, संघर्ष से समानता:जगदलपुर में सावित्रीबाई फुले के विचारों की गूंज**

जगदलपुर। नारी सशक्तीकरण की प्रतीक, सामाजिक न्याय की अग्रदूत एवं देश की प्रथम महिला शिक्षिका क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की जयंती शनिवार को तिरंगा चौक स्थित अम्बेडकर वार्ड में श्रद्धा, गरिमा और सामाजिक चेतना के साथ मनाई गई। इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में महिलाओं ने सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने सावित्रीबाई फुले के जीवन संघर्ष और शिक्षा के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि वे केवल एक शिक्षिका नहीं, बल्कि समानता, शिक्षा और महिला अधिकारों की सशक्त क्रांति थीं। उस दौर में जब समाज में महिलाओं की शिक्षा का विरोध होता था, तब उन्होंने शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बनाकर सामाजिक कुरीतियों को चुनौती दी।
इस अवसर पर संभागीय अध्यक्ष दिनेश यदू ने कहा कि सावित्रीबाई फुले की जयंती समाज को यह संदेश देती है कि सेवा और शिक्षा के बिना सशक्त समाज का निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले समानता, न्याय और करुणा के मूल्यों के प्रति पूरी तरह समर्पित थीं तथा उनका दृढ़ विश्वास था कि शिक्षा ही सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। उनके विचार और कार्य आज भी प्रासंगिक और प्रेरणादायी हैं।
कार्यक्रम में ओम साहू ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को शिक्षा के अधिकार से जोड़कर नारी सशक्तीकरण को नई दिशा दी। सामाजिक विरोध और उपेक्षा के बावजूद देश का पहला बालिका विद्यालय स्थापित करना उनके साहस और दूरदर्शिता का प्रतीक है। उनका प्रेरणादायी जीवन आज भी समाज सुधार और राष्ट्र निर्माण के लिए मार्गदर्शक बना हुआ है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थितजनों ने संकल्प लिया कि सावित्रीबाई फुले के विचारों को केवल स्मरण तक सीमित न रखते हुए शिक्षा, समानता और महिला सम्मान को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे




