डीएफओ मनीष कश्यप का कमाल, वीरान गोठान अब बनेंगे महुआ से गुलजार

मनेंद्रगढ़, 06 सितंबर 2025 पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने अपने पाँच वर्ष के कार्यकाल में गोठान और गोबर पर विशेष फोकस किया था। प्रदेशभर में करीब 8 हज़ार गोठान बनाए गए, जिन पर औसतन 50 लाख रुपये तक खर्च हुए। बावजूद इसके आज ज़्यादातर गोठान खाली और बंजर पड़े हैं। कई जगह ये अतिक्रमण और असामाजिक गतिविधियों के अड्डे भी बनते जा रहे हैं।
इसी समस्या को देखते हुए मनेंद्रगढ़ वनमंडल के डीएफओ मनीष कश्यप ने एक विशेष पहल की है। उन्होंने ‘महुआ बचाओ अभियान’ के तहत इन बंजर गोठानों को हराभरा बनाने का काम शुरू किया है। गोठानों में पहले से मौजूद फेंसिंग की मरम्मत कराकर वहाँ महुआ के पौधे लगाए जा रहे हैं। इससे न केवल अतिक्रमण रुका है बल्कि भविष्य में ग्रामीणों को आय का स्थायी स्रोत भी मिलेगा। अब तक मनेंद्रगढ़ वनमंडल के 98 गोठानों में 60 हज़ार महुआ पौधे लगाए जा चुके हैं।
ग्रामीणों की सहमति के लिए प्रत्येक पंचायत से एनओसी ली गई और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में पौधारोपण की शुरुआत की गई। पिछले वर्ष भी वन विभाग ने ग्रामीणों को 30 हज़ार ट्री गार्ड देकर महुआ के पौधे लगाए थे, जिसे ग्रामीणों से जबरदस्त समर्थन मिला। इस वर्ष अब तक 1.12 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं, जिनमें 30 हज़ार ग्रामीण घरों में, 22 हज़ार बाड़ी में और 60 हज़ार गोठानों में लगाए गए हैं।
क्यों ज़रूरी है महुआ बचाना?
महुआ पेड़ की औसत आयु 60 वर्ष होती है। प्रदेश में अब बड़े महुआ पेड़ ही दिखते हैं जबकि छोटे और मध्यम आयु के पेड़ लगभग खत्म हो गए हैं। ग्रामीणों द्वारा आगजनी और महुआ बीज के अत्यधिक संग्रहण की वजह से इनके पुनरुत्पादन में बाधा आती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जंगल से बाहर महुआ पौधों के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में महुआ पेड़ संकटग्रस्त हो सकते हैं।
एक महुआ पेड़ से आदिवासी परिवार औसतन 2 क्विंटल फूल और 50 किलो बीज इकट्ठा करता है, जिसकी सालाना क़ीमत करीब 10 हज़ार रुपये होती है। यही वजह है कि आदिवासियों की आर्थिक, धार्मिक और सामाजिक ज़िंदगी में महुआ का विशेष स्थान है।
इस प्रयास के लिए आईएफएस अधिकारी मनीष कश्यप को दिल्ली में ‘नेक्सस ऑफ गुड’ फाउंडेशन अवार्ड से सम्मानित भी किया जा चुका है।
वन विभाग का मानना है कि यह पहल पूरे प्रदेश और देशभर के आदिवासी अंचलों के लिए मॉडल साबित हो सकती है।




