मारकंडी नदी सूखने से मक्का की फसल पर संकट

,,चिंतित किसानों ने बस्तर कलेक्टर से लगाई गुहार,,


जगदलपुर। बस्तर जिले के बस्तर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंडगुड़ा, मधोता-02, खैरगुड़ा और बड़े अलनार के किसानों की मक्का फसल इन दिनों गंभीर संकट में है। कारण है मारकंडी नदी का सूख जाना, जिससे खेतों तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
फसल को बचाने की आस में किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल आज बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा से मिला और उन्हें अपनी समस्या से अवगत कराया।
,,दो–तीन दिन में छोड़ा जाएगा पानी: कलेक्टर,,
किसानों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए कलेक्टर आकाश छिकारा ने आश्वासन दिया कि दो से तीन दिनों के भीतर नदी में पानी छोड़ा जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दे दिए हैं, ताकि जल्द से जल्द सिंचाई व्यवस्था बहाल की जा सके और किसानों की मक्का फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
,,रबी सीजन की प्रमुख फसल है मक्का,,
खैरगुड़ा, बड़े अलनार और मधोता क्षेत्र के अधिकांश किसान रबी मौसम में मक्का की खेती पर निर्भर रहते हैं। लेकिन इस वर्ष गर्मी के शुरुआती दौर में ही नदी का जलस्तर गिर जाने से खेतों में खड़ी फसल सूखने लगी है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते पानी नहीं मिला, तो भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
,,बांध मरम्मत और स्टॉपडेम बना संकट की वजह,,
किसानों ने बताया कि कोसारटेडा बांध में मरम्मत कार्य के चलते इस बार नदी में पानी नहीं छोड़ा गया, जिससे मारकंडी नदी तेजी से सूख गई। इसके अलावा, नदी पर बने स्टॉपडेम को अनियमित रूप से खोले जाने के कारण भी जलस्तर में गिरावट आई है।
सिंचाई उद्देश्य से बनाए गए स्टॉपडेम के गलत संचालन से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
,,किसानों की एकजुट मांग—तुरंत पानी छोड़ा जाए,
इस दौरान संजय सिंह ठाकुर, बलदेव ठाकुर, त्रिनाथ ठाकुर, मनोज कुमार ठाकुर, नरेश ठाकुर, हरगोविंद सिंह, दिनेश कुमार, शेषनाथ, भोलाराम, नंदो ठाकुर, हेमंत ठाकुर सोनसाय और लखेश्वर ठाकुर भूषण सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि नदी में शीघ्र पानी छोड़ा जाए, ताकि मक्का की फसल को बचाया जा सके।
अब किसानों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है। यदि तय समय में पानी छोड़ा जाता है, तो खेतों में हरियाली लौट सकती है, अन्यथा मेहनत और उम्मीद—दोनों सूखने का खतरा बना रहेगा।




