दिल्ली

दिल्ली के घाटों पर सुबह की पहली किरण के साथ छठी मैया की जयकार: आज व्रतियों का पारण, जाने पूरे नियम और महत्व

दिल्ली। सूर्य उपासना और तपस्या का महान पर्व छठ आज अपने अंतिम और सबसे पवित्र चरण में प्रवेश कर गया। कार्तिक शुक्ल सप्तमी को व्रती 36 घंटे के निर्जला उपवास के बाद उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगे। यह सिर्फ व्रत तोड़ने का क्षण नहीं, बल्कि छठी मैया की पूर्ण कृपा से मनोकामनाएं पूरी होने का शुभ अवसर माना जाता है।

28 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 06 बजकर 30 मिनट पर होगा। इससे पहले ही राजधानी के घाटों पर हजारों श्रद्धालु कमर तक पानी में खड़े होकर हाथों में बांस की सूप, फल, कच्चा दूध और गंगाजल लिए सूर्य देव को अंतिम अर्घ्य अर्पित करेंगे।

अर्घ्य के बाद व्रती प्रसाद से भरे सूप को सिर पर रखकर घर लौटते हैं। फिर एक घूंट जल या दूध का शरबत पीकर निर्जला व्रत का पारण करते हैं और छठी मैया को चढ़ाए गए प्रसाद जैसे ठेकुआ और कसार लड्डू का सेवन करते हैं। इसके बाद सभी परिवारजन भी प्रसाद ग्रहण करते हैं।

पारण में आज भी तामसिक भोजन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। प्याज, लहसुन या मसालेदार भोजन से परहेज कर व्रती हल्का और सात्विक भोजन ही करेंगे ताकि लंबे उपवास के बाद शरीर को आराम मिल सके।

छठ घाटों पर ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धा और अनुशासन की अनोखी मिसाल देखने को मिलेगी। सूर्य की पहली किरण जैसे ही गंगा-यमुना-नदी तटों को स्पर्श करेगी, वैसे ही व्रती श्रद्धा से जल अर्पित कर इस व्रत की सफलता की कामना करेंगे।
छठ महापर्व का यह समापन लाखों परिवारों के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि के नए सूरज का उदय करने वाला माना जाता है।

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