Bastar news update:बस्तर में नौकरी, किसान और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, पटवारियों का आंदोलन तेज, नौ करोड़ के शौचालय पड़े बेकार

जगदलपुर,3 नवंबर 2026
बस्तर संभाग में इन दिनों रोजगार, किसानों की परेशानी, स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी योजनाओं को लेकर कई अहम मुद्दे सामने आए हैं। बस्तर फाइटर्स भर्ती में मात्र 79 पदों को लेकर युवाओं में नाराजगी है। दूसरी ओर चक्रवात के असर से धान कटाई प्रभावित हो रही है। पटवारियों की हड़ताल से राजस्व व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। वहीं अस्पताल में बिजली व्यवस्था, करोड़ों के मोबाइल शौचालय और रावघाट रेललाइन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पढ़िए बस्तर की छह प्रमुख खबरें।
1. बस्तर फाइटर्स के 79 पदों पर भर्ती, युवाओं में नाराजगी
बस्तर में सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे युवाओं के बीच बस्तर फाइटर्स भर्ती को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है। गृह विभाग की ओर से फाइटर आरक्षक के केवल 79 पदों पर भर्ती की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद बेरोजगार युवाओं ने विरोध जताया।
सोमवार सुबह आमागुड़ा इलाके में बड़ी संख्या में जुटे युवाओं ने करीब एक घंटे तक नारेबाजी कर अपनी नाराजगी जाहिर की। युवाओं का कहना है कि जिले में बेरोजगारों की संख्या को देखते हुए 79 पद बेहद कम हैं। उन्होंने भर्ती का दायरा बढ़ाकर स्थानीय युवाओं को अधिक अवसर देने की मांग की है।
जारी अधिसूचना के अनुसार कुल 79 पदों में 50 पद एसटी, 16 अनारक्षित, 11 ओबीसी और 2 एससी वर्ग के लिए निर्धारित किए गए हैं। इस भर्ती में केवल बस्तर जिले के स्थानीय पात्र युवा ही आवेदन कर सकेंगे।
आवेदन प्रक्रिया 2 नवंबर 2026 से शुरू हो चुकी है और अंतिम तारीख 12 दिसंबर 2026 शाम 5 बजे तक निर्धारित है। अब अभ्यर्थियों की नजर शासन के फैसले पर है कि पदों की संख्या बढ़ाई जाएगी या भर्ती 79 पदों पर ही पूरी होगी।
2. दिवाली से पहले पटाखा दुकानों की तैयारी, लॉटरी से होगा प्लॉट आवंटन
जगदलपुर में दीपावली के बाजार से पहले प्रशासन ने पटाखों की अस्थायी दुकानों के लिए व्यवस्था तय कर दी है। इस बार लालबाग मैदान में पटाखा दुकानों के लिए अस्थायी प्लॉट आवंटित किए जाएंगे।
प्रशासन के अनुसार मैदान में शौचालय के पीछे की ओर दुकानों के लिए स्थान निर्धारित किया गया है। आवंटन प्रक्रिया में केवल वैध पटाखा लाइसेंसधारी कारोबारी ही शामिल हो सकेंगे।
इसके लिए 3 नवंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक व्यवसायियों को स्वयं उपस्थित होना होगा। आवेदकों को जीवित पटाखा लाइसेंस, आधार कार्ड की मूल प्रति और छायाप्रति साथ लानी होगी।
प्रत्येक प्लॉट के लिए 12 हजार 100 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके बाद उसी दिन दोपहर 3 बजे लॉटरी पद्धति से दुकानों का आवंटन किया जाएगा। कलेक्ट्रेट कार्यालय में दर्ज जीवित लाइसेंसधारियों की सूची में नाम होना अनिवार्य है।
3. भिलाई की नई भट्ठी से रावघाट रेललाइन को मिली रफ्तार की उम्मीद
भिलाई स्टील प्लांट की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी से बस्तर की करीब छह दशक पुरानी रावघाट-जगदलपुर रेललाइन परियोजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
भिलाई में प्रतिदिन 11 हजार टन हॉट मेटल उत्पादन क्षमता वाला विशाल ब्लास्ट फर्नेस स्थापित किया जा रहा है। उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ लौह अयस्क की मांग भी बढ़ेगी। वहीं दल्ली राजहरा की खदानों में अयस्क का भंडार सीमित होता जा रहा है। ऐसे में रावघाट से जगदलपुर तक रेललाइन का विस्तार औद्योगिक जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस परियोजना के साथ रावघाट, चारगांव, हाहालद्दी और महामाया जैसी खदानों से लौह अयस्क परिवहन की संभावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। बैलाडीला क्षेत्र में एनएमडीसी खनन का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
हालांकि बस्तर के लोगों की मांग केवल मालगाड़ियों तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेललाइन से यात्री सुविधाएं भी मिलनी चाहिए, ताकि क्षेत्र के लोगों को नियमित ट्रेन सेवा का लाभ मिल सके।
वहीं नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण की चर्चाओं ने स्थानीय औद्योगिक भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
4. चक्रवात मुरासु का असर, बारिश ने रोकी धान कटाई की रफ्तार
बस्तर में किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इस खरीफ सीजन में पहले इंद्रावती नदी की बाढ़, फिर लगातार बारिश, कीट प्रकोप और फसल रोगों ने किसानों की परेशानी बढ़ाई। अब चक्रवात मुरासु के असर से रुक-रुककर हो रही बारिश ने धान कटाई की रफ्तार थाम दी है।
कई खेतों में धान पककर तैयार है, लेकिन जमीन में नमी के कारण हार्वेस्टर मशीनें खेतों में नहीं उतर पा रही हैं। जिन किसानों ने फसल काटकर रखी है, उन्हें बारिश में धान भीगने और खराब होने का डर सता रहा है।
लोहंडीगुड़ा, बस्तर, तोकापाल और बकावंड के ग्रामीण इलाकों में किसान धूप निकलने का इंतजार कर रहे हैं।
किसानों की चिंता केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। बारिश के कारण धान की गुणवत्ता और बाजार में मिलने वाले भाव पर भी असर पड़ने की आशंका है। लगातार मौसम की मार झेल रहे किसानों के सामने अब अपनी बची हुई फसल को सुरक्षित घर तक पहुंचाने की चुनौती है।
5. जनरेटर मौजूद, फिर भी ऑपरेशन थिएटर में छाया अंधेरा
कोंडागांव जिला मुख्यालय स्थित मातृत्व एवं शिशु अस्पताल में बिजली गुल होने की घटना ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल में जनरेटर उपलब्ध होने के बावजूद बिजली जाने पर ऑपरेशन थिएटर तक वैकल्पिक बिजली आपूर्ति नहीं पहुंच सकी।
जानकारी के मुताबिक रविवार सुबह करीब 7:30 बजे परिजन एक गर्भवती महिला को अस्पताल लेकर पहुंचे थे। जांच के दौरान चिकित्सकों ने गर्भस्थ शिशु की धड़कन नहीं मिलने और उसकी मृत्यु होने की जानकारी दी। इसके बाद महिला के ऑपरेशन की तैयारी शुरू की गई।
इसी दौरान अस्पताल की बिजली गुल हो गई। परिजनों का आरोप है कि बिजली की समस्या के चलते उन्हें महिला को जगदलपुर ले जाने की सलाह तक दी गई। हालांकि बाद में बिजली आपूर्ति बहाल होने के बाद महिला का ऑपरेशन किया गया।
सीएचएमओ डॉ. आरके चतुर्वेदी के मुताबिक महिला की स्थिति फिलहाल स्वस्थ है। उन्होंने तकनीकी खामी की जांच के लिए इंजीनियर बुलाने और पूरे सिस्टम का परीक्षण कराने की बात कही है।
इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आपातकालीन स्थिति में जब ऑपरेशन थिएटर को तत्काल बिजली की जरूरत थी, तब अस्पताल का बैकअप सिस्टम काम क्यों नहीं आया?
6. नौ करोड़ के मोबाइल शौचालय गांवों में कबाड़, उपयोगिता पर उठे सवाल
नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के दुर्गम गांवों में स्वच्छता सुविधा पहुंचाने के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये की योजना अब सवालों के घेरे में है। करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से खरीदे गए मोबाइल बायो शौचालय अलग-अलग स्थानों पर बेकार पड़े हुए हैं।
कुकड़ाझोर से आकाबेड़ा मार्ग और ओरछा के विभिन्न इलाकों में ये चलित शौचालय अनुपयोगी स्थिति में पड़े हैं। कहीं टायर पंचर हैं तो कहीं जरूरी पुर्जे गायब हैं, जिसके कारण इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
जानकारी के मुताबिक पिछली सरकार के कार्यकाल में इनकी खरीदी की गई थी। एक मोबाइल बायो टॉयलेट यूनिट की कीमत 6 लाख 13 हजार 600 रुपये बताई गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अबूझमाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए योजना की उपयोगिता का आकलन किस आधार पर किया गया था। स्थानीय स्तर पर इन शौचालयों की खरीदारी, भुगतान, उपयोगिता और रखरखाव की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
मामले में कलेक्टर नम्रता जैन के सामने भी सरकारी धन के उपयोग और जिम्मेदारी तय करने की चुनौती है।
7. पटवारियों की हड़ताल से राजस्व व्यवस्था प्रभावित, सड़क पर उतरा संघ
बस्तर जिले में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण राजस्व संबंधी कामकाज लगातार प्रभावित हो रहा है। 13 अक्टूबर से आंदोलन कर रहे पटवारियों ने अब अपनी मांगों को लेकर रैली निकालकर शासन का ध्यान आकर्षित किया।
2 नवंबर को राजस्व पटवारी संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में पटवारियों ने कृषि उपज मंडी स्थित धरना स्थल से रैली निकाली। दोपहर 2 बजे शुरू हुई रैली चांदनी चौक से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। यहां मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन कलेक्टर को सौंपकर लंबित मांगों का शीघ्र निराकरण करने की मांग की गई।
पटवारियों की हड़ताल का सीधा असर आम लोगों के राजस्व संबंधी कामों पर पड़ रहा है। आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों के लिए जरूरी प्रतिवेदन अटके हुए हैं। इसके अलावा भुइयाँ पोर्टल, डीसीएस और एग्रीस्टैक में अनुमोदन की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
फसल कटाई प्रयोग, टीआरएस पत्रक तैयार करने, शिविर और प्रोटोकॉल ड्यूटी जैसे विभागीय काम भी प्रभावित हो रहे हैं।
संघ का कहना है कि उनकी लंबित और न्यायसंगत मांगों पर शासन की ओर से अब तक समाधान नहीं निकला है। ऐसे में पटवारियों और शासन के बीच जारी गतिरोध का असर आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।




