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चित्रकोट की मछुआ सहकारी समिति ने बदली 62 परिवारों की तकदीर, अध्यक्ष धनसिंह बघेल को मिलेगा राज्य स्तरीय सम्मान

जगदलपुर, 2 नवंबर 2026

बस्तर के चित्रकोट क्षेत्र में सहकारिता और सामूहिक प्रयासों से आजीविका की नई मिसाल पेश करने वाले धनसिंह बघेल को राज्य के प्रतिष्ठित ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। राज्य शासन ने सहकारिता के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए यह घोषणा की है। धनसिंह बघेल चित्रकोट स्थित प्राथमिक कुडुक मछुआ एवं नौका विहार सहकारी समिति मर्यादित के अध्यक्ष हैं। उनके नेतृत्व में समिति ने मत्स्य पालन और पर्यटन के जरिए क्षेत्र के 62 परिवारों की आर्थिक स्थिति में बदलाव लाया है।

2009 में 42 सदस्यों के साथ हुई थी समिति की शुरुआत

इंद्रावती नदी के तट पर बसे इस क्षेत्र में पहले ग्रामीण मुख्य रूप से पारंपरिक मछली पकड़ने, वनोपज संग्रहण और कृषि पर निर्भर थे। इसी स्थिति को बदलने के उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग के मार्गदर्शन में वर्ष 2009 में 42 सदस्यों के साथ सहकारी समिति की स्थापना की गई।

समिति ने ग्राम पंचायत के रावन मुंडा और वर्ष 2014 से चित्रकोट सिंचाई जलाशय को पट्टे पर लेकर मत्स्य पालन की गतिविधियों को आगे बढ़ाया। इससे ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर तैयार हुए।

मत्स्य पालन के साथ नौका विहार से भी हो रही कमाई

प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के पर्यटन महत्व को देखते हुए समिति ने सहकारिता विभाग के माध्यम से नौका विहार को भी अपनी गतिविधियों में शामिल किया। इससे समिति की आय के स्रोतों में विस्तार हुआ।

वर्तमान में समिति में कुल 62 सदस्य हैं, जिनमें 41 पुरुष और 21 महिलाएं शामिल हैं। समिति आज क्षेत्र में आजीविका और स्वावलंबन का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है।

हर साल लाखों रुपये की आय अर्जित कर रही समिति

समिति द्वारा जलाशय और इंद्रावती नदी से प्रतिवर्ष क्रमशः 1,980 किलोग्राम और 3,600 किलोग्राम मछली उत्पादन किया जा रहा है। इससे करीब 9.5 लाख रुपये की वार्षिक आय अर्जित होती है।

वहीं, चित्रकोट आने वाले पर्यटकों को नौका विहार की सुविधा उपलब्ध कराकर समिति सालाना लगभग 8 लाख रुपये की आमदनी कर रही है।

समिति का औसत वार्षिक शुद्ध लाभ लगभग 10 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। वर्ष 2024-25 में समिति ने 8 लाख 32 हजार 985 रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था।

आधुनिक सुविधाओं से लैस हुई सहकारी समिति

समिति के पास वर्तमान में पर्यटकों की सुरक्षा और संचालन के लिए 250 लाइफ जैकेट, 7 नावें और आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं।

शासन की शुरुआती अनुदान सहायता और योजनाओं का लाभ लेकर समिति अब आत्मनिर्भर बन चुकी है। अपनी आर्थिक मजबूती के दम पर समिति ने स्वयं के खर्च से मछली अवतरण के लिए लैंडिंग सेंटर का निर्माण कराया है। इसके अलावा मछलियों के परिवहन के लिए पिकअप वाहन भी खरीदा है।

62 परिवारों के जीवनस्तर में आया बदलाव

समिति की आर्थिक प्रगति का सकारात्मक असर इससे जुड़े सभी 62 परिवारों पर पड़ा है। अब सदस्य अपने आवागमन के लिए मोटरसाइकिल खरीदने में सक्षम हो रहे हैं। इसके साथ ही वे अपने बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी उपलब्ध करा पा रहे हैं।

धनसिंह बघेल के नेतृत्व में समिति ने स्थानीय संसाधनों, सहकारिता और पर्यटन के समन्वय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की मिसाल पेश की है। ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार के लिए उनका चयन बस्तर में सहकारिता के माध्यम से हो रहे आर्थिक बदलाव और सामूहिक प्रयासों को मिली पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

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