छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में फार्मेसी की हजारों सीटें खाली, बी.फार्म और डी.फार्म में प्रवेश का मौका, 30 अक्टूबर अंतिम तिथि

रायपुर, 19 अक्टूबर 2026

छत्तीसगढ़ में फार्मेसी शिक्षा को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। कभी युवाओं के बीच लोकप्रिय रहे फार्मेसी कोर्स में अब हजारों सीटें खाली हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बैचलर ऑफ फार्मेसी (बी.फार्म) की कुल 4,000 सीटों में से 2,200 सीटें खाली हैं। वहीं, डिप्लोमा इन फार्मेसी (डी.फार्म) की 8,000 सीटों में से करीब 3,800 सीटों पर प्रवेश नहीं हो पाया है। खाली सीटों को भरने के लिए संस्थागत चरण (इंस्टीट्यूशनल राउंड) को मंजूरी दी गई है। इस चरण में प्रवेश लेने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।

फार्मेसी में घटते रुझान से बढ़ी चिंता

फार्मेसी एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही है। इसके कारण महत्वपूर्ण व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में भी सीटें खाली रह जा रही हैं।

उन्होंने इसके पीछे पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के सीमित अवसर और प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े कठिन नियमों को प्रमुख कारण बताया। उनके अनुसार, सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर मिल सकें।

स्वास्थ्य व्यवस्था में फार्मासिस्ट की अहम भूमिका

फार्मेसी केवल दवाइयां बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। डॉक्टर मरीजों को दवाएं लिखते हैं, जबकि फार्मासिस्ट दवाओं की गुणवत्ता, उनके उचित उपयोग, संभावित दुष्प्रभावों और मरीजों को सही जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अस्पतालों, दवा निर्माण कंपनियों, रिसर्च लैब, ड्रग कंट्रोल विभाग और क्लिनिकल रिसर्च जैसे क्षेत्रों में फार्मासिस्ट की जरूरत होती है। इसके अलावा, जेनेरिक दवाओं, डिजिटल हेल्थ और फार्माकोविजिलेंस जैसे क्षेत्रों में भी प्रशिक्षित पेशेवरों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

कोविड-19 महामारी के दौरान दवाओं की आपूर्ति और वैक्सीन प्रबंधन में फार्मेसी क्षेत्र की उपयोगिता भी सामने आई थी। इसके बावजूद, रोजगार की अनिश्चितता के कारण युवाओं का इस क्षेत्र से मोहभंग होने की चिंता जताई जा रही है।

कम वेतन और सरकारी नौकरियों की कमी बड़ी वजह

फार्मेसी की पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं के सामने रोजगार प्राप्त करना बड़ी चुनौती बन जाता है। सरकारी पदों की सीमित संख्या के कारण अधिकांश युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी या अपना व्यवसाय शुरू करने का विकल्प चुनना पड़ता है।

रिपोर्ट के अनुसार, निजी मेडिकल स्टोर में शुरुआती वेतन कई जगह 8,000 से 15,000 रुपये प्रतिमाह तक सीमित रहता है। लंबे कार्य घंटे, काम का दबाव और करियर में आगे बढ़ने को लेकर अनिश्चितता भी युवाओं को निराश करती है।

कई दवा कंपनियों में अनुभव की मांग और शुरुआती स्तर पर कम वेतन मिलने से भी नए उम्मीदवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कुछ युवा दूसरे क्षेत्रों में रोजगार तलाशने लगते हैं।

खाली सीटों से शिक्षण संस्थानों को भी नुकसान

फार्मेसी पाठ्यक्रमों में बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने का असर केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है। इससे शिक्षण संस्थानों की आर्थिक स्थिति, शिक्षकों के रोजगार और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

फार्मासिस्ट स्वास्थ्य सेवाओं में दवाओं के सुरक्षित उपयोग और मरीजों को सही सलाह देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में फार्मेसी शिक्षा को प्रोत्साहन देना स्वास्थ्य व्यवस्था और फार्मा उद्योग दोनों के लिए आवश्यक है।

सरकार से रोजगार और प्रवेश व्यवस्था में सुधार की मांग

फार्मेसी क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि इस स्थिति में सुधार के लिए सरकार को कई स्तरों पर कदम उठाने होंगे। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित सुझाव शामिल हैं:

  • सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरत के अनुसार फार्मासिस्ट के पद बढ़ाना।
  • ड्रग इंस्पेक्टर और अन्य नियामक पदों पर नियमित भर्ती सुनिश्चित करना।
  • प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाना और अनावश्यक जटिलताओं को कम करना।
  • विद्यार्थियों के लिए स्किल डेवलपमेंट, व्यावहारिक प्रशिक्षण और इंटर्नशिप की बेहतर व्यवस्था करना।
  • फार्मा कंपनियों के साथ संस्थानों का संपर्क मजबूत कर प्लेसमेंट के अवसर बढ़ाना।
  • फार्मासिस्ट के वेतन, कार्य परिस्थितियों और पेशेवर सम्मान में सुधार करना।
  • स्कूल स्तर से ही विद्यार्थियों को फार्मेसी में उपलब्ध करियर विकल्पों की जानकारी देना।
  • स्वरोजगार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण तथा आसान ऋण की सुविधाएं उपलब्ध कराना।

30 अक्टूबर तक प्रवेश का मौका, दीर्घकालिक समाधान जरूरी

छत्तीसगढ़ में बी.फार्म और डी.फार्म की हजारों खाली सीटों को भरने के लिए संस्थागत चरण के तहत प्रवेश की प्रक्रिया जारी है। इच्छुक पात्र विद्यार्थी 30 अक्टूबर 2026 तक प्रवेश की उपलब्ध संभावनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन, पात्रता, सीटों की उपलब्धता और प्रवेश संबंधी नियमों के लिए संबंधित संस्थान या आधिकारिक प्रवेश प्राधिकरण से जानकारी लेना उचित होगा।

हालांकि, केवल प्रवेश की अंतिम तिथि बढ़ाने या अतिरिक्त चरण शुरू करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को कम करना जरूरी है।

फार्मेसी जैसे महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों का भरोसा बनाए रखने के लिए रोजगार के बेहतर अवसर, उचित वेतन, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और उद्योगों से मजबूत जुड़ाव आवश्यक हैं। समय रहते ठोस कदम उठाए गए तो फार्मेसी शिक्षा को नई दिशा मिल सकती है और युवाओं के लिए बेहतर भविष्य के रास्ते खुल सकते हैं।

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