छत्तीसगढ़जगदलपुरबस्तर संभाग

BASTAR NEWS UPDATE:बस्तर में रेल संकट से यात्री परेशान, धर्मांतरण विवाद से गांवों में तनाव, लालबाग में पहली बार मुरिया दरबार; बस किराया बढ़ने से जेब पर बोझ

जगदलपुर,15 अक्टूबर 2026

बस्तर संभाग में इन दिनों रेल परिचालन बाधित होने, धर्मांतरण को लेकर विवाद, बस किराये में बढ़ोतरी और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दे चर्चा में हैं। कहीं रेल सेवा बंद होने से यात्रियों को महंगा सफर करना पड़ रहा है, तो कहीं धार्मिक परंपराओं और स्वतंत्रता को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच 23 अक्टूबर को लालबाग मैदान में पहली बार मुरिया दरबार आयोजित करने की तैयारी है। वहीं रावघाट परियोजना से प्रभावित लोगों ने रोजगार, फसल मुआवजे और बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रशासन के सामने मांगें रखी हैं। पढ़ें बस्तर संभाग की प्रमुख खबरें।

1. किरंदुल पैसेंजर बंद होने से यात्री परेशान, 35 रुपये के सफर के लिए देने पड़ रहे 228 रुपये

जगदलपुर। केके रेललाइन पर भूस्खलन के कारण रेल यातायात प्रभावित होने से किरंदुल और दंतेवाड़ा क्षेत्र के हजारों यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। मल्लीगुड़ा स्टेशन के पास 25 सितंबर को हुए भूस्खलन के बाद विशाखापट्टनम से बस्तर आने वाली ट्रेनों का परिचालन कोरापुट तक सीमित कर दिया गया है। दूसरी ओर, किरंदुल से विशाखापट्टनम जाने वाली पैसेंजर ट्रेन पिछले 20 दिनों से किरंदुल स्टेशन पर खड़ी है।

यात्रियों का कहना है कि जब दूसरी ट्रेनों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत चलाया जा रहा है, तो इस पैसेंजर ट्रेन को जयपुर या जगदलपुर तक क्यों नहीं चलाया जा सकता। रेल प्रबंधन से पिछले 15 दिनों से ट्रेन को नवरात्रि स्पेशल के रूप में चलाने की मांग की जा रही है।

ट्रेन बंद होने से बसों का सहारा, किराये में कई गुना बढ़ोतरी

रेल सेवा बाधित होने से किरंदुल, बचेली, भांसी और दंतेवाड़ा के यात्रियों को बसों से सफर करना पड़ रहा है। जिस यात्रा के लिए किरंदुल से जगदलपुर तक करीब 35 रुपये और दंतेवाड़ा से लगभग 25 रुपये रेल किराया लगता था, उसके लिए यात्रियों को क्रमशः 228 रुपये और 180 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

नवरात्रि में मां दंतेश्वरी के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं पर भी अतिरिक्त किराये का बोझ पड़ रहा है। बस्तर सांसद महेश कश्यप ने बताया कि उन्होंने ईस्ट कोस्ट रेलवे के महाप्रबंधक से ट्रेन दोबारा चलाने का आग्रह किया है। अब यात्रियों को राहत देने के लिए वैकल्पिक रेल परिचालन शुरू होने का इंतजार है।

2. ग्रामसभा का फरमान: धार्मिक गतिविधियों के लिए लिखित अनुमति की बात, धार्मिक स्वतंत्रता पर बहस

जगदलपुर। बस्तर जिले की नानगुर तहसील के बड़े बोदल गांव में धर्मांतरण को लेकर विवाद ग्रामसभा के फैसले तक पहुंच गया है। 14 अक्टूबर को आयोजित बैठक के बाद ग्रामीणों ने गांव के अटल चौक पर सूचना बोर्ड लगाया है। इसमें धार्मिक गतिविधियों के लिए ग्रामसभा की लिखित अनुमति अनिवार्य होने की बात कही गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि चंगाई सभाओं और बीमारी ठीक करने के दावों के जरिए लोगों को प्रभावित किया जा रहा है। उनका कहना है कि धर्म परिवर्तन के बाद कुछ परिवार देवगुड़ी, माटी पूजा और शीतला पूजा जैसी पारंपरिक मान्यताओं से दूरी बना रहे हैं।

पेसा कानून और संवैधानिक अधिकारों को लेकर सवाल

ग्रामसभा ने इस कदम के पीछे पेसा कानून और आदिवासी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का तर्क दिया है। हालांकि, इस फैसले के साथ धार्मिक स्वतंत्रता और गांव में आने-जाने के संवैधानिक अधिकारों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

संविधान का अनुच्छेद 25 धर्म मानने और उसका पालन करने की स्वतंत्रता देता है, जबकि पेसा कानून अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की भूमिका को मान्यता देता है। इन प्रावधानों के आधार पर धार्मिक गतिविधियों या आवागमन पर किस सीमा तक प्रतिबंध लगाया जा सकता है, यह कानूनी परीक्षण का विषय है। ऐसे में आदिवासी परंपराओं की रक्षा के साथ नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।

3. गोरगुंडा में धर्मांतरण विवाद से तनाव, धर्मांतरित परिवारों के घर खाली कराने की कोशिश

सुकमा। जिले के दोरनापाल क्षेत्र में धर्मांतरण को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। गोरगुंडा पंचायत के देवरपल्ली में एक परिवार के घर खाली कराने की घटना के करीब एक सप्ताह बाद अब गोरगुंडा गांव में भी तनाव की स्थिति बन गई है।

जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों ने धर्मांतरित परिवारों को गांव से हटाने की मांग करते हुए उनके घर खाली कराने की कोशिश की। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को कानून हाथ में नहीं लेने की हिदायत दी। इसके बाद शीतला मंडप परिसर में ग्रामीणों, प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित परिवारों के बीच बैठक कराई गई।

परंपरा में वापसी की मांग पर परिवार में मतभेद

ग्रामीणों की मांग थी कि धर्मांतरित परिवार अपनी मूल आदिवासी संस्कृति में वापस लौटें। बैठक के दौरान परिवार के कुछ पुरुष सदस्यों ने वापसी पर सहमति जताई, जबकि महिलाओं ने इससे इनकार कर दिया। इस मतभेद के कारण बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।

ग्रामीणों का दावा है कि दो घरों की सीमेंट की छतें निकालकर सुरक्षित रखी गई हैं। प्रशासन ने विवाद को शांत कराने का प्रयास किया है। इस मामले में धार्मिक स्वतंत्रता और आवास के अधिकारों की रक्षा करते हुए गांव में शांति बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।

4. लालबाग में पहली बार मुरिया दरबार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शामिल होने की तैयारी

जगदलपुर। बस्तर दशहरा की सदियों पुरानी परंपरा इस बार नए स्वरूप में दिखाई देने जा रही है। 23 अक्टूबर को पहली बार पारंपरिक सिरहासार भवन के बाहर लालबाग मैदान में मुरिया दरबार आयोजित करने की तैयारी है। इस आयोजन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति को बस्तर दशहरा में शामिल होने का निमंत्रण दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार किया है। राष्ट्रपति का छत्तीसगढ़ प्रवास 22 और 23 अक्टूबर को प्रस्तावित है।

राष्ट्रीय मंच पर दिखेगी बस्तर की जनजातीय परंपरा

मुरिया दरबार बस्तर की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसमें जनजातीय समाज के प्रतिनिधि अपनी समस्याएं, मांगें और क्षेत्र से जुड़े मुद्दे सामने रखते हैं। अब तक सिरहासार भवन में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम पहली बार लालबाग मैदान में व्यापक स्तर पर आयोजित करने की तैयारी है।

इससे बस्तर की जनजातीय परंपराओं और स्थानीय समाज की अपेक्षाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखने का अवसर मिलेगा। राष्ट्रपति इससे पहले फरवरी 2026 में जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित बस्तर पंडुम में शामिल हुई थीं। उनके प्रस्तावित आगमन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और आयोजन से जुड़ी तैयारियां तेज कर दी हैं।

5. रावघाट परियोजना पर स्थानीय लोगों की मांग, रोजगार से फसल मुआवजे तक उठाए सवाल

नारायणपुर/कांकेर। रावघाट खनन परियोजना क्षेत्र में स्थानीय लोगों को रोजगार और विकास का लाभ दिलाने का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। बूढ़ादेव अंजरेल माइंस श्रमिक विकास समिति ने बस्तर संभाग के कमिश्नर तथा नारायणपुर और उत्तर बस्तर कांकेर के कलेक्टरों को संयुक्त ज्ञापन सौंपा है।

समिति ने लौह अयस्क परिवहन का भाड़ा 707 रुपये से बढ़ाकर 910 रुपये प्रति टन करने की मांग की है। नारायणपुर-अंतागढ़ मार्ग की खराब स्थिति से वाहनों को नुकसान और वाहन मालिकों पर बढ़ते खर्च का मुद्दा भी उठाया गया है।

दूषित पानी से फसल नुकसान का आरोप, मुआवजे की मांग

समिति का आरोप है कि परियोजना प्रभावित क्षेत्र के स्थानीय युवाओं को गैर-तकनीकी और अर्ध-तकनीकी पदों पर पर्याप्त रोजगार नहीं मिल रहा है। खदानों से निकलने वाले दूषित लालपानी से खेतों और फसलों को नुकसान होने का आरोप लगाते हुए किसानों का संयुक्त सर्वे कराने और मुआवजा देने की मांग की गई है।

इसके अलावा 24 घंटे की ड्यूटी, नो-एंट्री व्यवस्था और फाइनेंस कंपनियों के एजेंटों की कथित प्रताड़ना का मुद्दा भी उठाया गया। समिति ने स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने, अतिथि शिक्षकों का मानदेय बढ़ाने, बंद सोलर लाइटों और उप स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत की मांग रखी है।

बच्चों को लंबी दूरी तय करने से राहत देने के लिए स्कूल को नारायणपुर या भैसगांव के पास स्थानांतरित करने का प्रस्ताव भी दिया गया है। समिति का कहना है कि वह परियोजना का विरोध नहीं कर रही, बल्कि प्रभावित ग्रामीणों, किसानों, श्रमिकों और युवाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठा रही है। अब प्रशासन के निर्णय पर सबकी नजरें टिकी हैं।

6. बस किराया बढ़ने से यात्रियों की जेब पर बोझ, निर्धारित दर से अधिक वसूली की शिकायतें

जगदलपुर। बस्तर संभाग में बस से सफर करना आम यात्रियों के लिए पहले से महंगा हो गया है। परिवहन विभाग की नई किराया दरों के बाद सामान्य, डीलक्स और एसी बसों में यात्रा का खर्च बढ़ने की जानकारी सामने आई है। इससे रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के बजट पर असर पड़ रहा है।

बताई गई नई दरों के अनुसार, सामान्य बस में शुरुआती पांच किलोमीटर के लिए 10 रुपये और उसके बाद प्रति किलोमीटर 1 रुपये 75 पैसे किराया निर्धारित है। डीलक्स बसों में शुरुआती पांच किलोमीटर के लिए 12 रुपये और उसके बाद प्रति किलोमीटर 2 रुपये 20 पैसे की दर बताई गई है। वहीं, एसी स्लीपर और सेमी-स्लीपर बसों के लिए प्रति किलोमीटर 3 रुपये 20 पैसे का किराया बताया गया है।

जगदलपुर-दंतेवाड़ा रूट पर अधिक किराया वसूली का आरोप

यात्रियों ने निर्धारित किराये से अधिक वसूली की शिकायत की है। उदाहरण के तौर पर जगदलपुर से दंतेवाड़ा का निर्धारित किराया 160 रुपये बताया गया है, जबकि कुछ बसों में 180 रुपये वसूले जाने का आरोप है।

दूसरी ओर, बस संचालकों का कहना है कि डीजल, टायर, ऑयल, टोल टैक्स और अन्य परिचालन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। संचालकों के मुताबिक, जगदलपुर-रायपुर मार्ग पर एक बस के आने-जाने का टोल खर्च करीब 3,000 रुपये तक पहुंच रहा है।

उनका तर्क है कि सरकार टैक्स में राहत दे तो यात्रियों पर बढ़ते किराये का बोझ कम किया जा सकता है। अब यात्रियों की मांग है कि परिवहन विभाग किराया दरों को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक करे और निर्धारित दर से अधिक वसूली की शिकायतों पर कार्रवाई करे।

7. CRPF जवान की मौत के बाद मानसिक स्वास्थ्य पर फिर उठे सवाल

सुकमा। बस्तर में नक्सल मोर्चे पर तैनात सुरक्षा बलों के जवानों की मानसिक सेहत और कल्याण व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चिंता सामने आई है। 13 अक्टूबर की मध्यरात्रि मेट्टागुड़म कैंप में 131वीं वाहिनी CRPF के उपनिरीक्षक देवानंद यादव ने अपने सर्विस हथियार से खुद को गोली मार ली। साथी जवान उन्हें फील्ड एंबुलेंस से इल्मागुड़ा कैंप ले गए, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, फिलहाल इस घटना के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारण सामने आ सकेगा।

देशभर में जवानों की आत्महत्या के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से दिसंबर 2025 में संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2023 से 2025 के दौरान केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, असम राइफल्स और NSG में आत्महत्या के 438 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें CRPF के 159 मामले शामिल थे। ये आंकड़े देशभर के हैं, केवल बस्तर के नहीं।

सरकार के अनुसार, जवानों के तनाव को कम करने के लिए काउंसलिंग, तनाव प्रबंधन कार्यशालाएं, योग और ध्यान जैसी गतिविधियां संचालित की जाती हैं।

कठिन तैनाती, परिवार से दूरी और निजी परेशानियां कुछ जवानों के लिए चुनौती बन सकती हैं, इसलिए समय पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता तक पहुंच सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस घटना के कारणों को किसी सामान्य परिस्थिति से जोड़ना उचित नहीं होगा। यह घटना सुरक्षा बलों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता की उपलब्धता और प्रभाव की समीक्षा करने की जरूरत को फिर सामने लाती है।

Related Articles

Back to top button
You Cannot able to copy the content! All Reserved Rights of Bastar Dagar