बस्तर की आज की पूरी अपडेट: सूखे तालाब, बारिश की कमी से लेकर माउस डियर रेस्क्यू तक, जानिए दिनभर की बड़ी खबरें

बस्तर,20 अगस्त 2026
बस्तर संभाग से जुड़ी कई अहम समस्याएं एक बार फिर सामने आई हैं। कहीं गांव गंगा योजना के बंद पड़े बोरवेलों से तालाब सूख रहे हैं, तो कहीं बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं दंतेवाड़ा में कुत्तों से बचकर आबादी क्षेत्र में पहुंचे माउस डियर का वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू किया है। इसके अलावा जर्जर भवन के छज्जे से छात्र के घायल होने, एकलव्य स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की कमी और दूरदर्शन स्टूडियो के सीमित उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
गांव गंगा योजना बंद, तालाबों पर मंडराया संकट
राज्य गठन के शुरुआती दौर में वर्ष 2000 में शुरू की गई गांव गंगा योजना का उद्देश्य गर्मियों में सूखने वाले गांवों के तालाबों को बोरवेल के माध्यम से पानी उपलब्ध कराना था। तालाबों में पानी रहने से ग्रामीणों की निस्तारी जरूरतें पूरी होती थीं और मवेशियों को भी पानी मिलता था।
लेकिन बस्तर में योजना के तहत लगाए गए करीब 200 बोरवेल लंबे समय से बंद पड़े हैं। कई स्थानों पर मोटर और अन्य उपकरण खराब हो चुके हैं, जबकि कुछ जगहों पर सामान चोरी होने की बात भी सामने आई है। इसका सीधा असर गांवों के तालाबों और उन पर निर्भर ग्रामीणों के जीवन पर पड़ रहा है।
तालाबों में पर्याप्त पानी नहीं होने से मत्स्य पालन करने वालों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बंद पड़ी पुरानी व्यवस्था को सुधारकर दोबारा शुरू करने की मांग की है।
199 मिलीमीटर बारिश की कमी, किसानों की बढ़ी चिंता
बस्तर में इस बार मानसून की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। जिले में अब तक 627.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 826.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। इस तरह जिले में करीब 199.1 मिलीमीटर यानी लगभग 24 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है।
बारिश के लंबे अंतराल से खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। खासकर धान की फसल के लिए पानी की कमी किसानों की चिंता बढ़ा रही है। किसानों की नजर अब आने वाले दिनों की बारिश पर टिकी है। अच्छी बारिश होने पर कमी की भरपाई संभव है, लेकिन सूखे जैसे हालात बने रहे तो खरीफ उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
कुत्तों से बचकर कलेक्ट्रेट पहुंचा माउस डियर
दंतेवाड़ा कलेक्ट्रेट परिसर में अचानक पहुंचे माउस डियर को देखकर लोगों की भीड़ जुट गई। बताया गया कि कुत्तों के पीछा करने से घबराया यह वन्यजीव अपनी जान बचाते हुए आबादी क्षेत्र में पहुंच गया था।
सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और माउस डियर को सुरक्षित रेस्क्यू किया। इसके बाद पशु चिकित्सा अधिकारी से उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। जांच में उसे स्वस्थ पाए जाने के बाद बचेली क्षेत्र के उपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
वन विभाग ने बताया कि आबादी क्षेत्र में पहुंचने वाले वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर उनके प्राकृतिक आवास में वापस भेजना जरूरी है।
जर्जर छज्जा गिरने से छात्र घायल, इलाज में ढाई लाख खर्च
बस्तर के नगर स्थित सुभाष चौक में जर्जर आंगनबाड़ी भवन का छज्जा गिरने से एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया। स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में कक्षा आठवीं में पढ़ने वाले छात्र के हाथ और पैर में गंभीर चोटें आई हैं।
छात्र के इलाज पर अब तक करीब ढाई लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और आगे भी उपचार की जरूरत बताई गई है। परिवार ने प्रशासन से आर्थिक सहायता की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन लंबे समय से जर्जर हालत में था, लेकिन समय रहते उसकी मरम्मत नहीं कराई गई। हादसे के बाद क्षेत्र के सभी जर्जर सरकारी भवनों की सुरक्षा जांच कराने की मांग उठाई गई है।
440 बच्चों के लिए महज चार शौचालय, एकलव्य स्कूल की व्यवस्था पर सवाल
बीजापुर जिले के भैरमगढ़ स्थित पीएमश्री एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। परिजनों के अनुसार बालक और बालिका छात्रावास में करीब 220-220 विद्यार्थी रह रहे हैं, लेकिन दोनों छात्रावासों में महज दो-दो शौचालय उपलब्ध हैं।
कई शौचालय खराब होने की शिकायत भी सामने आई है, जिससे विद्यार्थियों को रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ विद्यार्थियों के छात्रावास परिसर से बाहर जाने की मजबूरी बनने की बात भी कही गई है।
बालिका छात्रावास में सैनिटरी पैड की नियमित उपलब्धता नहीं होने की शिकायत भी अभिभावकों ने की है। मामले को लेकर जांच और आवश्यक सुधार का आश्वासन दिया गया है।
करोड़ों का स्टूडियो, लेकिन सप्ताह में सिर्फ एक घंटे का प्रसारण
जगदलपुर के धरमपुरा में स्थित अत्याधुनिक दूरदर्शन स्टूडियो अपनी क्षमता के मुकाबले बेहद सीमित उपयोग में लिया जा रहा है। करीब 34 साल पुराने इस स्टूडियो में बस्तर की स्थानीय संस्कृति और हल्बी, भतरी, गोंडी, मुरिया, माड़िया और छत्तीसगढ़ी जैसी भाषाओं में कार्यक्रम तैयार किए जाते रहे हैं।
वर्तमान में बस्तर के कार्यक्रमों का प्रसारण सप्ताह में केवल दो दिन आधा-आधा घंटा होने की बात सामने आई है। इससे स्थानीय कलाकारों को बड़ा मंच मिलने के अवसर कम हो रहे हैं।
स्टूडियो में कर्मचारियों की कमी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। कभी यहां 50 से अधिक कर्मचारी कार्यरत थे, लेकिन अब कई विभागों में स्टाफ की संख्या काफी कम हो गई है। स्थानीय कलाकारों और लोगों ने बस्तर की संस्कृति और प्रतिभाओं को मंच देने के लिए नियमित और अधिक समय तक स्थानीय कार्यक्रमों के प्रसारण की मांग की है।




