नलपावंड पंचायत के पुजारीपारा में जर्जर सड़क से ग्रामीण बेहाल

,नाली सफाई के बाद सड़क पर छोड़ी गई मिट्टी से कीचड़ और जलभराव, वर्षों से पक्की सड़क की मांग कर रहे ग्रामीण,
बकावंड, 01 अगस्त 2026,
बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत नलपावंड के पुजारीपारा मोहल्ले में जर्जर सड़क और कीचड़ से ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित हो गया है। नाली की सफाई के बाद निकाली गई मिट्टी को पंचायत द्वारा सड़क पर ही छोड़ दिए जाने से पूरा मार्ग कीचड़, गड्ढों और जलभराव में तब्दील हो गया है। बरसात के दौरान हालात और भी गंभीर हो गए हैं, जिससे रोजमर्रा का आवागमन कठिन हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर जगह-जगह पानी भरने और कीचड़ फैलने के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। दोपहिया और चारपहिया वाहन आए दिन फंस रहे हैं, जबकि कई लोग फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं। इसका सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें आवश्यक कार्यों के लिए इसी मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है।
ग्रामीण नेपाल बघेल, गोस्वामी कश्यप, जोगेंद्र सेठिया, भुवने सेठिया, हरेश सेठिया, दिलीप, मनीष, मुकेश बघेल एवं नरसिंह कश्यप ने बताया कि नाली निर्माण और सफाई के बाद निकाली गई मिट्टी को हटाने के लिए उन्होंने कई बार सरपंच, पंच और पंचायत सचिव से शिकायत की। इसके बावजूद केवल आश्वासन ही मिलता रहा और आज तक मिट्टी नहीं हटाई गई। उनका कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण सड़क पूरी तरह कीचड़ में बदल गई है, जिससे आवागमन करना जोखिम भरा हो गया है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पुजारीपारा में वर्षों से पक्की सड़क की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। उनका आरोप है कि पंचायत के अन्य मोहल्लों तथा आसपास के गांवों में सीसी रोड और डामर सड़क का निर्माण कराया जा चुका है, जबकि पुजारीपारा को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि सड़क पर पड़ी मिट्टी को तत्काल हटाकर आवागमन सुचारु कराया जाए तथा पुजारीपारा में शीघ्र पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि लोगों को बरसात के मौसम में इस परेशानी से स्थायी राहत मिल सके।
फिलहाल पुजारीपारा के ग्रामीण जर्जर सड़क और कीचड़ भरे मार्ग से रोजाना गुजरने को मजबूर हैं। अब देखना होगा कि पंचायत और प्रशासन ग्रामीणों की वर्षों पुरानी पक्की सड़क की मांग पर कब तक गंभीरता दिखाते हैं और उन्हें इस समस्या से राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।




