ग्राम पंचायत मोंगरापाल में मुरिया समाज का ऐतिहासिक मिलन समारोह

“नशे के खिलाफ कठोर निर्णय : ₹5000 अर्थदंड व 3 माह का सामाजिक बहिष्कार”
बस्तर। बकावंड ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत मोंगरापाल में मुरिया समाज का एक ऐतिहासिक एवं निर्णायक मिलन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें समाज के प्रमुखों, वरिष्ठजनों एवं युवाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर मुरिया समाज की रीति-नीति, परंपरा, सामाजिक अनुशासन एवं सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा को लेकर सर्वसम्मति से कड़े और स्पष्ट निर्णय लिए गए।
मिलन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि मुरिया समाज बस्तर की प्राचीनतम आदिवासी संस्कृतियों में से एक है, जिसकी पहचान सदैव संघर्ष, स्वाभिमान, सामूहिक चेतना एवं अनुशासन से रही है। समाज ने पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए सामाजिक मर्यादा एवं जिम्मेदारी को सर्वोपरि रखा है।
समारोह को संबोधित करते हुए युवा आदिवासी नेता हेमंत कश्यप ने नशे के दुष्परिणामों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नशा समाज और युवाओं के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि समाज द्वारा लिया गया यह निर्णय किसी को भयभीत करने के लिए नहीं, बल्कि युवाओं को नशे की बर्बादी से बचाकर समाज को सशक्त एवं संगठित बनाने के उद्देश्य से है।
मुरिया समाज के प्रमुखों द्वारा सर्वसम्मति से यह सामाजिक निर्णय पारित किया गया कि यदि कोई व्यक्ति नशा सेवन कर समाज में अशांति, विवाद या उपद्रव फैलाता है, तो उस पर ₹5000 का अर्थदंड लगाया जाएगा तथा उसे लगातार तीन माह के लिए समाज से पूर्ण रूप से बहिष्कृत किया जाएगा। समाज ने स्पष्ट किया कि अनुशासन ही सामाजिक एकता और पहचान की सबसे बड़ी ताकत है।
इस अवसर पर निलकुमार बघेल, छेदीनाथ कश्यप, दिनानाथ कश्यप, बंशीधर कश्यप, भोलानाथ, महादेव नाइक, बुदरू, बोंग, भक्तु, धरम सिंह मौर्य, मदन सिंह बघेल, विश्वनाथ कश्यप, फूलसिंह, विक्रम, प्रथम कश्यप, ताराबाई कश्यप, पार्वती मौर्य, सावित्री कश्यप, लच्छन दई कश्यप सहित 52 मुरिया परिवारों के सैकड़ों ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
मिलन समारोह का समापन नशा-मुक्त मुरिया समाज, सामाजिक एकता एवं सांस्कृतिक स्वाभिमान की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ। समाजजनों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह ऐतिहासिक निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत, अनुशासित एवं गौरवशाली समाज की नींव साबित




