अमृत सरोवर ने बदली घाटधनोरा की तस्वीर, जल संरक्षण के साथ आजीविका का नया आधार



बस्तर। ग्राम पंचायत घाटधनोरा में निर्मित अमृत सरोवर आज ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन का बेहतरीन उदाहरण बन गया है। लंबे समय तक जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाए गए इस सरोवर ने गाँव को जल-संपन्न बनाने के साथ ही ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव लाया है।
अमृत सरोवर के निर्माण से वर्षा जल का प्रभावी संग्रहण संभव हुआ है, जिससे आसपास के 2.5 एकड़ कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिल रही है। मुख्य मार्ग पर स्थित होने से यह स्थान अब राहगीरों के लिए भी विश्राम और शांति का केंद्र बन चुका है।
ग्रामीणों ने आजीविका बढ़ाने की दिशा में सरोवर का सदुपयोग करते हुए शासन से 25 किलो मछली बीज लेकर मछली पालन शुरू किया है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। वहीं सरोवर के सौंदर्यीकरण के लिए स्थानीय लोगों ने मिलकर फलदार पौधों का रोपण कर इसे और आकर्षक बनाया है।
ग्रामवासियों का कहना है कि आज उनका गाँव सचमुच जल-संपन्न हो गया है और यह उनकी सामूहिक मेहनत और संकल्प का परिणाम है।
मनरेगा के तहत तालाब निर्माण से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिला—1384 परिवारों को कुल 8424 मानव-दिवस का कार्य, तथा 17.667 लाख रुपये की मजदूरी राशि का लाभ प्राप्त हुआ। महिलाओं ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें रोजमर्रा के कार्यों के लिए दूर-दूर से पानी लाने की परेशानी नहीं होती।
➡️ अमृत सरोवर केवल एक संरचना नहीं, बल्कि गाँव के विकास, आजीविका और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुका है।
घाटधनोरा का अमृत सरोवर साबित करता है कि जब जल संरक्षण के साथ सामुदायिक प्रयास जुड़ जाए, तो छोटे गाँव भी बड़े बदलावों की मिसाल बन जाते हैं।




