उलनार भद्रकाली मंदिर में नवरात्रि पर्व पर भक्तों की भारी भीड़, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम बना केंद्र


डमरू कश्यप,बकावंड। नवरात्रि पर्व की पावन बेला में बकावंड ब्लॉक के ग्राम उलनार स्थित ऐतिहासिक भद्रकाली माता मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। माता के जयकारों से वातावरण गूंज उठा और भक्तों ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मंदिर पुजारी तुलसी ने कहा हर साल की तरह इस बार भी भक्तों ने मंदिर परिसर में ज्योत प्रज्वलित कर माता की आराधना की। नौ कन्याओं को आमंत्रित कर उन्हें भोजन कराया गया, जिसे ‘कन्या भोज’ की पावन परंपरा कहा जाता है। और आगे कहा कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर भोजन कराने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
नारायण सिंह कश्यप ने कहा मंदिर की खास परंपरा ‘माता वास’ के अनुसार, पुजारी की पत्नी को माता का रूप माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि उनके माध्यम से देवी शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही परंपरा इस मंदिर को और भी विशेष बनाती है।
नवरात्रि के पहले दिन से ही मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, अनुष्ठान और भजन-कीर्तन का आयोजन शुरू हो गया है। स्थानीय कलाकार और ग्रामीण सामूहिक रूप से भक्ति गीतों के माध्यम से माता की महिमा का गुणगान करते हैं। आसपास के गाँवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उलनार पहुँचते हैं, जिससे यह स्थल न सिर्फ धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक महत्व का भी केंद्र बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि उलनार भद्रकाली माता मंदिर आस्था और परंपरा का प्रमुख केंद्र है। उनका विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से पूजा करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है। नवरात्रि के दिनों में यह मंदिर पूरे क्षेत्र का आध्यात्मिक केंद्र बन जाता है।




