नान घोटाला: पूर्व IAS आलोक शुक्ला ने ईडी कोर्ट में किया सरेंडर, सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है। मामले में आरोपी पूर्व आईएएस डॉ. आलोक शुक्ला ने ईडी कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद ईडी की टीम ने गुरुवार सुबह भिलाई स्थित उनके घर पर दबिश दी थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए आलोक शुक्ला ने कोर्ट का रुख किया और सरेंडर कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट से खारिज हुई थी जमानत
नान घोटाले में आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को पहले हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने जमानत खारिज कर दी। कोर्ट ने आदेश दिया है कि दोनों अफसरों को पहले दो हफ्ते ईडी की कस्टडी में और उसके बाद दो हफ्ते न्यायिक हिरासत में रहना होगा। इसके बाद ही जमानत मिल सकेगी। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि आरोपियों ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी।
भूपेश सरकार में मिली थी ताकतवर पोस्टिंग
घोटाले का खुलासा फरवरी 2015 में हुआ था। उस समय आलोक शुक्ला खाद्य विभाग के सचिव थे। ईओडब्ल्यू ने उनके खिलाफ दिसंबर 2018 में चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बावजूद 2019 में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को ताकतवर पोस्टिंग दी गई थी। इसी दौरान उन पर जांच प्रभावित करने के आरोप लगे। इस मामले में पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा का भी नाम आया था, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई।
क्या है नान घोटाला?
नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) घोटाला फरवरी 2015 में उजागर हुआ था, जब एसीबी/ईओडब्ल्यू ने एक साथ 25 परिसरों पर छापेमारी की थी। छापों में 3.64 करोड़ रुपए नकद और घटिया क्वालिटी का चावल-नमक जब्त किया गया था। आरोप था कि राइस मिलरों से घटिया चावल खरीदकर करोड़ों की रिश्वत ली गई। चावल के भंडारण और परिवहन में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। मामले में कई अफसर और अधिकारी आरोपी बनाए गए, जिनमें आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा भी शामिल हैं।
👉 नान घोटाले से जुड़ा यह मामला अब एक बार फिर सुर्खियों में है और ईडी कोर्ट में सरेंडर के बाद आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।




