तेंदूपत्ता घोटाला: डीएफओ समेत 14 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

तेंदूपत्ता घोटाला: डीएफओ समेत 14 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
रायपुर! आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने तेंदूपत्ता प्रोत्साहन भुगतान घोटाले में 14 लोगों के खिलाफ 4500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। आरोपियों में एक वन मंडलाधिकारी (DFO) भी शामिल है। यह चार्जशीट मंगलवार को दंतेवाड़ा की विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में प्रस्तुत की गई।
आरोपियों में सुकमा वन मंडल के डीएफओ अशोक कुमार पटेल शामिल हैं, जिन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 467, 468, 471, 120B और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(a) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
EOW की जांच में सामने आया कि अशोक कुमार पटेल ने लोकसेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अन्य वन विभाग के अधिकारियों, प्रबंधकों और विभिन्न प्राथमिक लघु वनोपज समितियों के पालक अधिकारियों के साथ मिलकर षड्यंत्रपूर्वक लगभग 7 करोड़ रुपये की तेंदूपत्ता प्रोत्साहन राशि में गबन किया। यह राशि 2021 और 2022 सीजन में तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए दी जानी थी। आरोपियों ने जाली दस्तावेज तैयार कर उन्हें असली बताकर उपयोग किया।
अब तक की जांच में 17 में से 8 दूरस्थ समितियों पर फोकस किया गया है, जिनमें से 3,92,05,362 रुपये के गबन का खुलासा हुआ है, जिससे राज्य सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है।
आरोपी 14 लोग हैं:
अशोक कुमार पटेल (DFO)
चार वन कर्मचारी/पालक अधिकारी: चैतुराम बघेल, देवनाथ भारद्वाज, मनीष कुमार बर्से, पोड़ियामी हिडमा
नौ समिति प्रबंधक: पायम सत्यनारायण उर्फ शत्रु, मोहम्मद शरीफ, सीएच रमण (चित्तूरी), सुनील नुप्पो, रवि कुमार (रवि कुमार गुप्ता), आयतु कोरसा, मनोज कवासी, राजशेखर पुराणिक उर्फ राजू, और बी. संजय रेड्डी
तेंदूपत्ता संग्रहण नक्सल प्रभावित और आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र के निवासियों की एक मुख्य आजीविका है। EOW ने मड़ई गुरहा, गोपालपल्ली, किस्ताराम, जगरगुंडा, चिंतालनार, चिंतागुफा, भेज्जी, कोंटा, और पोलेमपल्ली जैसे दुर्गम और सुदूर गांवों में जाकर ग्रामवासियों से पूछताछ की। गांव वालों ने प्रोत्साहन योजना की जानकारी नहीं होने की बात कही और महत्वपूर्ण सबूत भी प्रदान किए। शेष 9 समितियों की जांच जारी है।
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