छत्तीसगढ़जगदलपुरबस्तर संभाग

माता मावली की विदाई के साथ 75 दिवसीय बस्तर दशहरा का हुआ भव्य समापन

“श्रद्धालुओं ने भावविह्वल होकर किया माई जी को विदा”

जगदलपुर, 07 अक्टूबर 2025।
विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा का भव्य और भावनाओं से परिपूर्ण समापन मंगलवार को माता मावली विदाई की परंपरागत रस्म के साथ हुआ। करीब 75 दिनों तक चले इस अद्वितीय सांस्कृतिक महापर्व के अंतिम दिवस पर हजारों श्रद्धालु अपार भक्ति और उत्साह के साथ माता मावली की डोली और छत्र को विदा करने एकत्र हुए।

दंतेश्वरी मंदिर से प्रारंभ हुई माई जी की डोली यात्रा गाजे-बाजे और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच जिया डेरा तक पहुँची। इस दौरान श्रद्धालु “जय माई जी” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

इस अवसर पर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, महापौर संजय पांडे, उपाध्यक्ष बलराम मांझी, समिति के पारंपरिक सदस्य मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, नाईक-पाईक, तथा वरिष्ठ अधिकारी — कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी, कलेक्टर हरिस एस, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।


“गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ माता मावली का गरिमामय विदाई समारोह”

मां दंतेश्वरी मंदिर परिसर में विशेष रूप से सजे मंच पर माता मावली की डोली को रखा गया, जहाँ हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। परंपरा के अनुसार बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव ने आरती कर माई जी की पूजा-अर्चना की। तत्पश्चात पुलिस जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देते हुए हर्ष फायर किया।

इसके उपरांत श्री भंजदेव ने स्वयं माई जी की डोली को कंधे पर उठाया और शोभायात्रा के साथ जिया डेरा के लिए प्रस्थान किया। राजपरिवार के अन्य सदस्यों ने भी इस पवित्र रस्म में सहभागी होकर सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया।

शोभायात्रा के दौरान भक्तों ने फूलों की वर्षा कर माई जी को अश्रुपूरित विदाई दी। यह दृश्य बस्तर की लोकसंस्कृति की आत्मा को जीवंत कर गया। मावली माता की यह विदाई न केवल दशहरा समापन की रस्म है, बल्कि यह 600 वर्ष पुरानी बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का अनुपम प्रतीक भी है।


“श्रद्धा और आस्था से सजी भावुक यात्रा”

विदाई शोभायात्रा में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप, ढोल-मंजीरों की गूंज और श्रद्धालुओं की जयकारों से पूरा शहर गुंजायमान था। डोली के आगे कांवरिया माता के श्रृंगार सामग्री लेकर चल रहे थे, जबकि सिर पर कलश धारण की हुई महिलाएँ अपनी पारंपरिक पोशाकों में शोभायात्रा की शोभा बढ़ा रही थीं।

पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं ने माई जी की आरती उतारी, फूलों की वर्षा की और गले में गमकते स्वर में विदाई गीत गाए। जिया डेरा पहुँचने के बाद माता मावली की डोली और छत्र को सुसज्जित वाहन से दंतेवाड़ा के लिए रवाना किया गया।

इस भावपूर्ण समारोह के साथ बस्तर दशहरा का समापन हुआ — और भक्तों ने अगले वर्ष फिर से इस भव्य उत्सव की पुनरावृत्ति की कामना करते हुए माता से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और कल्याण का आशीर्वाद माँगा।

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