महासमुंद में 15 माओवादियों ने किया पुनर्वास: बीबीएम डिवीजन पूरी तरह खत्म, विजय शर्मा ने कहा– क्षेत्र अब नक्सल मुक्त

रायपुर, 01 मार्च 2026।
छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। बरगढ़–बलांगीर–महासमुंद (बीबीएम) डिवीजन के 15 माओवादियों ने सरकार की पुनर्वास नीति पर भरोसा जताते हुए महासमुंद जिले में हथियारों सहित आत्मसमर्पण कर पुनर्वास का मार्ग अपनाया। यह कार्रवाई “पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के तहत ओडिशा सीमा के निकट संपन्न हुई।
उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने पुनर्वास का रास्ता चुनने वाले युवाओं का स्वागत करते हुए कहा कि इस कदम के साथ ओडिशा राज्य कमेटी का पश्चिमी सब जोन—बरगढ़, बलांगीर और महासमुंद डिवीजन—पूरी तरह समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि अब रायपुर पुलिस रेंज और ओडिशा के संबलपुर रेंज क्षेत्र नक्सल प्रभाव से मुक्त हो चुके हैं, जिससे क्षेत्र में शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
आकाशवाणी से की थी अपील
उल्लेखनीय है कि बीबीएम डिवीजन की ओर से पूर्व में उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शासन की नीतियों पर विश्वास जताते हुए पुनर्वास की इच्छा व्यक्त की गई थी। इसके जवाब में विजय शर्मा ने उनकी सुरक्षा और सम्मान की गारंटी देते हुए आकाशवाणी के माध्यम से ऑडियो संदेश जारी कर 3 मार्च तक पुनर्वास की अपील की थी। उसी अपील के बाद 15 माओवादियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया।
25 लाख का इनामी कमांडर भी शामिल
इस दल में वारंगल निवासी विकास उर्फ सुदर्शन उर्फ जंगू उर्फ बाबन्ना उर्फ राजन्ना प्रमुख नाम रहा। वह ओडिशा राज्य कमेटी का स्टेट कमेटी मेंबर और बीबीएम डिवीजन प्रभारी था, जिस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह वर्ष 1985 से संगठन में सक्रिय था।
कुल 15 पुनर्वासित सदस्यों में 9 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल हैं। वे अपने साथ 3 एके-47, 2 एसएलआर, 2 इंसास, 4 .303 राइफल और 3 बारह बोर सहित कुल 14 अत्याधुनिक व ऑटोमेटिक हथियार लेकर आए।
‘निर्धारित समय में खत्म होगा नक्सलवाद’
विजय शर्मा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित समयावधि में छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। उन्होंने इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में बनी दूरदर्शी पुनर्वास नीति को दिया।
उन्होंने कहा कि किसी एक डिवीजन के शेष सभी सदस्यों का एक साथ पुनर्वास करना एक ऐतिहासिक और सराहनीय कदम है, जो राज्य में शांति स्थापना की दिशा में निर्णायक साबित होगा।




