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00करपावंड के जंगलों में करोड़ों का बांध घोटाला! किसानों की जमीन पर जबरन बना तालाब, मुआवजा नहीं, सुशासन पर सवाल00

00करपावंड के जंगलों में करोड़ों का बांध घोटाला! किसानों की जमीन पर जबरन बना तालाब, मुआवजा नहीं, सुशासन पर सवाल00

00 सुशासन तिहार के बीच बस्तर में हरे-भरे वन उजड़े, भ्रष्टाचार के दलदल में डूबा डिमरापाल परियोजना का सच 00

(डमरू कश्यप)!बकावंड:- छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप के गृह संभाग में वन विभाग के अधिकारी कैसे-कैसे गुल खिला रहे हैं, इसका एक बड़ा उदाहरण बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के करपावंड वन परिक्षेत्र में सामने आया है! यहां रेंजर और डिप्टी रेंजर ने तालाब निर्माण के नाम पर लाखों का गोलमाल किया है! डिमरापाल बांध तो बना नही! अब भ्र्ष्टाचारियों ने जमकर बंदर बांट कर एक आदिवासी किसान की जमीन हड़प कर निर्धारित स्थान के बजाय कक्ष क्रमांक 1174 सतोषा चालानगुड़ा बीट में, 2 लाख रु.की स्वीकृति बेस्ट वेयर बनाकर डिमरापाल बांध बता रहे हैं!

आपको बता दें कि करपावंड वन परिक्षेत्र में डिमरापाल नाले पर प्रस्तावित बांध निर्माण में करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। यह परियोजना 2023-24 में केम्पा मद (नरवा विकास योजना) के तहत स्वीकृत की गई थी, जिसमें रु. 30,52,574 की राशि बांध निर्माण के लिए मंजूर हुई थी। लेकिन आरोप है कि बांध को निर्धारित स्थान के बजाय कक्ष क्रमांक 1174 सतोषा चालन गुड़ा बीट में बनाया गया, जो कि बुदरू/गढ़रू नामक किसानों की पट्टे की जमीन पर है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्माण कार्य न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि हरे-भरे वन क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचाया गया है। किसानों को मछली पालन व अन्य लाभों का प्रलोभन देकर उनकी जमीनों पर कार्य शुरू किया गया, लेकिन न मुआवजा मिला और न ही वादे पूरे हुए। बुदरू कश्यप ने बताया कि “मेरे खेत में जबरन तालाब बना दिया गया, रेंजर और डिप्टी ने कहा था कि एक साल तक मछली पालन व सहायता देंगे, लेकिन कुछ नहीं मिला।”

ग्रामीणों के अनुसार इस परियोजना के नाम पर कई ट्रैक्टरों और मजदूरों का भुगतान भी अब तक नहीं किया गया है। प्रेम कश्यप, तुलाराम कश्यप, फूलसिंह कश्यप, जुगसाय कश्यप, प्रकाश कश्यप, समदु राम कश्यप, दयमन नेताम, धनसाय कश्यप सहित अन्य ग्रामीणों ने खुलकर इस भ्रष्टाचार का विरोध किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों द्वारा दबाव बनाकर जबरन हस्ताक्षर करवाए गए ताकि कोई विरोध न करे।

पुरनो कश्यप ने बताया कि “हमसे कहा गया था कि आसपास के खेतों को भी फायदा होगा, लेकिन अब तालाब से नीचे से पानी रिसकर जा रहा है और मछली पालन भी नहीं हो पा रहा है।”

प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल हालांकि कुछ ग्रामीणों ने डीएफओ को लिखित शिकायत भी दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

सुशासन तिहार के बीच घोटाले पर उठे सवाल राज्य सरकार इन दिनों मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ‘सुशासन तिहार’ मना रही है, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही की बात की जा रही है। लेकिन बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में हो रहे ऐसे घोटालों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यह स्थिति सुशासन की भावना पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है और शासन-प्रशासन की मंशा पर भी सवाल उठाती है।

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