नियमितीकरण और मानदेय वृद्धि की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने निकाली रैली

बस्तर ब्लॉक अध्यक्ष बेदमती जोशी एवं उपाध्यक्ष दीपिका कोरसे के नेतृत्व में बुलंद की आवाज, मुख्यमंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्री और विभागीय सचिव के नाम नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
बस्तर 27 अक्टूबर 2026
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं की लंबित मांगों को लेकर बस्तर में आवाज बुलंद हुई। नियमितीकरण, मानदेय वृद्धि, पदोन्नति और सामाजिक सुरक्षा जैसी प्रमुख मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संयुक्त मंच, छत्तीसगढ़ के बैनर तले कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने रैली निकालकर शासन का ध्यान आकर्षित कराया। बस्तर ब्लॉक अध्यक्ष बेदमती जोशी एवं ब्लॉक उपाध्यक्ष दीपिका कोरसे के नेतृत्व में निकाली गई इस रैली के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े तथा विभागीय सचिव के नाम ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा गया। संयुक्त मंच ने शासन से अपनी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर शीघ्र निराकरण की पहल करने की अपील की।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, गर्भवती महिलाओं एवं धात्री माताओं की देखभाल सहित शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी इनके कंधों पर होती है। इसके बावजूद लंबे समय से सेवा शर्तों, मानदेय और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर संयुक्त मंच ने एकजुट होकर अपनी मांगें शासन के समक्ष रखीं।
संयुक्त मंच की प्रमुख मांगों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित कर्मचारी का दर्जा देने तथा सहायिकाओं को कार्यकर्ता के पद पर पदोन्नत करने की मांग शामिल है। मंच ने नियमितीकरण होने तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रतिमाह 30 हजार रुपये और सहायिकाओं को 25 हजार 500 रुपये मानदेय दिए जाने की मांग रखी है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रतिवर्ष मानदेय में एक हजार रुपये की वृद्धि करने का प्रस्ताव भी ज्ञापन में शामिल किया गया है। मंच का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच वर्तमान मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना कठिन होता जा रहा है। ऐसे में सम्मानजनक मानदेय और नियमित वृद्धि की व्यवस्था समय की आवश्यकता है।
ज्ञापन में कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के लिए पेंशन, समूह बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में परिवार को आर्थिक सहायता तथा नियमानुसार अनुकंपा नियुक्ति की व्यवस्था करने की मांग की गई है। इसके अलावा पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता और तीन लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता का प्रावधान किए जाने की मांग भी रखी गई। संयुक्त मंच का कहना है कि वर्षों तक विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाली कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के भविष्य और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस अवसर पर बस्तर ब्लॉक अध्यक्ष बेदमती जोशी ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर अपनी सेवाएं दे रही हैं। बच्चों के पोषण से लेकर महिलाओं और माताओं की देखभाल तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उनकी अपनी समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त मंच के माध्यम से सभी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने एकजुट होकर अपनी जायज मांगों को शासन के समक्ष रखा है। शासन को नियमितीकरण, मानदेय वृद्धि, पदोन्नति और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
रैली और ज्ञापन के माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने एक बार फिर अपनी मांगों को शासन तक पहुंचाया है। अब देखना होगा कि वर्षों से सेवा दे रही इन कर्मियों की मांगों पर सरकार कब तक सकारात्मक निर्णय लेती है। फिलहाल कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को उम्मीद है कि उनकी आवाज शासन तक पहुंचेगी और उन्हें सम्मानजनक मानदेय, सेवा सुरक्षा तथा बेहतर भविष्य का अधिकार मिल सकेगा।




