
15वें वित्त की राशि पर फिर उठे सवाल: e-Gram Swaraj में भुगतान दर्ज, RTI के जवाब में कार्य से कथित इंकार; पूर्व सरपंच-सचिव की भूमिका पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
बकावंड 05 अक्टूबर 2026
डमरू कश्यप
जनपद पंचायत बकावंड की ग्राम पंचायत उड़ियापाल में 15वें वित्त आयोग की राशि को लेकर सामने आए कथित गड़बड़ी के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। बस्तर डगर द्वारा पूर्व में प्रकाशित खबर में पंचायत में 15वें वित्त की राशि को लेकर उठे सवालों को प्रमुखता से सामने लाया गया था। अब उसी मामले की आगे की पड़ताल में मुक्तिधाम शेड निर्माण के नाम पर हुए कथित भुगतान और RTI से सामने आई जानकारी में कंही नाम अंकित नही है। ऐसे में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार e-Gram Swaraj के Expenditure Detail में Voucher No. XVFC/2024-25/P/11, दिनांक 08 अक्टूबर 2024 के तहत “MUKHTI DHAM SEAD NIRMAN KARYA KA RASHI BHUGTAN” के नाम से ₹1,00,000 का भुगतान दर्ज दिखाई देता है।
लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जिस मुक्तिधाम शेड के निर्माण के नाम पर यह भुगतान दर्ज है, मौके पर ऐसा निर्माण दिखाई नहीं देता। यही अंतर अब पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
सरकारी रिकॉर्ड में भुगतान, जमीन पर निर्माण नहीं होने का दावा
15वें वित्त आयोग की राशि का उद्देश्य गांवों में मूलभूत सुविधाओं और विकास कार्यों को मजबूती देना है। लेकिन उड़ियापाल में मुक्तिधाम शेड निर्माण के नाम पर भुगतान का रिकॉर्ड सामने आने के बाद ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर जिस कार्य के नाम पर राशि जारी हुई, वह कार्य जमीन पर कहां है?
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना निर्माण कार्य कराए ही राशि का भुगतान कर दिया गया। उनका यह भी आरोप है कि भुगतान प्रक्रिया में बिल-वाउचर का इस्तेमाल किया गया और पंचायत स्तर पर जिम्मेदार लोगों की भूमिका संदिग्ध है।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
RTI ने बढ़ाया रहस्य, एक ही मामले में दो तस्वीरें
मामले का सबसे अहम पहलू सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी है।
ग्रामीणों के अनुसार RTI के माध्यम से 15 वें वित्त के योजना अंतर्गत ग्राम पंचायत से मुक्तिधाम शेड निर्माण के संबंधित नाम अंकित नही है। प्राप्त जवाब में कथित रूप से पंचायत ने इस तरह के कार्य से ही इंकार किया।
यहीं से मामला और गंभीर हो जाता है।
क्योंकि एक तरफ e-Gram Swaraj पर मुक्तिधाम शेड निर्माण के नाम पर ₹1 लाख का भुगतान दर्ज है, तो दूसरी तरफ RTI के जवाब में संबंधित कार्य के संबंध में अलग स्थिति सामने आने का दावा किया जा रहा है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है—
अगर कार्य हुआ था तो RTI में उसकी जानकारी क्यों नहीं?
और अगर कार्य नहीं हुआ था तो सरकारी पोर्टल पर भुगतान किस आधार पर दर्ज हुआ?
पूर्व सरपंच-सचिव पर ग्रामीणों ने लगाए आरोप
ग्रामीणों ने इस मामले में पूर्व सरपंच और तत्कालीन सचिव की मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर राशि निकाले जाने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि दस्तावेजों में कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान किया गया है, तो इसकी जांच केवल कागजों तक सीमित न रहकर मौके के भौतिक सत्यापन के साथ की जानी चाहिए।
साथ ही भुगतान से जुड़े बिल, वाउचर, संबंधित वेंडर, बैंक भुगतान और कार्य पूर्णता से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की मांग की गई है।
शिकायतें हुईं, लेकिन जांच का इंतजार
ग्रामीणों के मुताबिक इस मामले को लेकर जनपद पंचायत बकावंड के अधिकारियों के समक्ष शिकायत भी की गई। उनका कहना है कि जांच का आश्वासन तो मिला, लेकिन अब तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर है तो इसकी जांच में देरी नहीं होनी चाहिए।
पिछले दो वर्षों के कार्यों की जांच की मांग
उड़ियापाल के ग्रामीणों ने अब केवल मुक्तिधाम शेड ही नहीं, बल्कि पंचायत में पिछले दो वर्षों के दौरान 15वें वित्त आयोग सहित अन्य मदों से कराए गए सभी कार्यों की जांच की मांग की है।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रत्येक कार्य का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाए।
यदि जांच में राशि के दुरुपयोग या अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई के साथ सरकारी राशि की वसूली भी की जाए।
लखेश्वर कश्यप ने कहा—गांव की राशि का हिसाब देना होगा
आदिवासी समाज के युवा जिला अध्यक्ष लखेश्वर कश्यप ने कहा कि गांवों के विकास के लिए आने वाली राशि ग्रामीणों के हित की राशि है। इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और राशि की वसूली की मांग की।
उड़ियापाल का यह मामला अब सिर्फ एक लाख रुपये के भुगतान तक सीमित नहीं रह गया है।
एक तरफ सरकारी पोर्टल पर मुक्तिधाम शेड निर्माण के नाम पर भुगतान का रिकॉर्ड, दूसरी तरफ मौके पर निर्माण नहीं होने का ग्रामीणों का दावा, और तीसरी तरफ RTI के जवाब में कार्य से कथित इंकार—ये तीनों बातें पूरे मामले को गंभीर बनाती हैं।
अब सवाल प्रशासन से है कि क्या इन रिकॉर्डों का मिलान कर वास्तविकता सामने लाई जाएगी? क्या मौके पर भौतिक सत्यापन होगा? और अगर सरकारी राशि का दुरुपयोग प्रमाणित होता है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
फिलहाल ग्रामीणों को जांच का इंतजार है और बस्तर डगर इस मामले से जुड़े दस्तावेजों एवं प्रशासनिक कार्रवाई पर लगातार नजर बनाए हुए है।
बस्तर डगर — खबर आप तक।




