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आज एकादशी व्रत का पारण और शुक्र प्रदोष का संयोग: सुबह 6:27 से 8:42 बजे तक पारण का शुभ मुहूर्त, जानें पूजा के खास समय

23 अक्टूबर, शुक्रवार। आज पापांकुशा एकादशी व्रत का पारण और शुक्र प्रदोष व्रत है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि दोपहर 2:36 बजे तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी। भगवान शिव की पूजा के लिए आज प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

एकादशी व्रत पारण का शुभ समय

जिन श्रद्धालुओं ने पापांकुशा एकादशी का व्रत रखा था, वे शुक्रवार को सुबह 6:27 बजे से 8:42 बजे तक व्रत का पारण कर सकते हैं। व्रत पारण से पहले स्नान और पूजा-पाठ करने की परंपरा है।

आज का पंचांग

  • दिन: शुक्रवार
  • तिथि: आश्विन शुक्ल द्वादशी दोपहर 2:36 बजे तक, इसके बाद त्रयोदशी
  • योग: ध्रुव योग रात 10:09 बजे तक, इसके बाद व्याघात योग
  • करण: बालव
  • चंद्र राशि: कुंभ राशि में दोपहर 3:04 बजे तक, इसके बाद मीन राशि
  • ऋतु: शरद ऋतु
  • व्रत-त्योहार: पापांकुशा एकादशी व्रत पारण और शुक्र प्रदोष व्रत
  • दिशाशूल: पश्चिम
  • पंचक: पूरे दिन

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

  • सूर्योदय: सुबह 6:27 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 5:42 बजे
  • चंद्रोदय: दोपहर 3:51 बजे
  • चंद्रास्त: सुबह 3:20 बजे

आज के शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:45 से 5:36 बजे तक
  • अमृत काल: दोपहर 12:58 से 2:35 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 1:58 से 2:43 बजे तक
  • प्रदोष मुहूर्त: शाम 5:44 से रात 8:16 बजे तक
  • रवि योग: रात 9:02 बजे से अगले दिन सुबह 6:27 बजे तक
  • निशिता मुहूर्त: रात 11:40 बजे से अगले दिन रात 12:31 बजे तक

आज के शुभ चौघड़िया मुहूर्त

  • चर-सामान्य: सुबह 6:27 से 7:51 बजे तक
  • लाभ-उन्नति: सुबह 7:51 से 9:16 बजे तक
  • अमृत-सर्वोत्तम: सुबह 9:16 से 10:41 बजे तक
  • शुभ-उत्तम: दोपहर 12:05 से 1:30 बजे तक
  • चर-सामान्य: शाम 4:19 से 5:44 बजे तक
  • लाभ-उन्नति: रात 8:55 से 10:30 बजे तक

आज के अशुभ मुहूर्त

  • गुलिक काल: सुबह 7:51 से 9:16 बजे तक
  • राहुकाल: सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक
  • दुर्मुहूर्त: सुबह 8:42 से 9:27 बजे तक और दोपहर 12:28 से 1:13 बजे तक
  • यमगण्ड: दोपहर 2:54 से शाम 4:19 बजे तक
  • दिशाशूल: पश्चिम दिशा

शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। शुक्रवार को पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से सुख-समृद्धि तथा मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।

प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु इस दौरान शिवलिंग पर जल अर्पित कर सकते हैं और भगवान शिव की आरती तथा मंत्रों का जाप कर सकते हैं।

नोट: पंचांग में दिए गए मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय और भौगोलिक स्थिति के अनुसार बदल सकते हैं। पूजा-पाठ के लिए अपने स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि कर लें।

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